बस में कर रहा था फर्जी पास बनाकर सफर, आया पकड़ में

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़| 12/23/2016 11:13:10 PM
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रोडवेज में कुली के फर्जी पास बनाकर मुफ्त सफर कराने का मामला पकड़ में आया है। सूत्रों की माने तो विभिन्न डिपो में टाइम-कीपर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। पहला मामला ऋषिकेश डिपो का पकड़ा गया, लेकिन रोडवेज मुख्यालय ने सूबे के सभी डिपो में फर्जी पास पर जांच बैठा दी है। महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने बताया कि रोडवेज में कुली पास का कोई प्रावधान ही नहीं है। पास जारी करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऋषिकेश डिपो की बस (यूके07-पीए-3091) बीती चार दिसंबर को दिल्ली जा रही थी। बस में 49 यात्री सवार थे। हरिद्वार के बाद एजीएम रुड़की के साथ मौजूद चेकिंग टीम ने बस रोक ली। बस पर आउटसोर्स परिचालक अनुज कुमार तैनात थे। चेकिंग टीम द्वारा टिकट मशीन कब्जे में ली गई तो 48 यात्रियों के टिकट बने हुए थे, जबकि एक यात्री पास धारक था। पास चेक किया गया तो वह ऋषिकेश डिपो से जारी कुली पास था और उस पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर भी नहीं थे। यह पास संजय सिंह निवासी ग्राम गोयला, जिला मुजफ्फरनगर के नाम पर जारी हुआ था। टीम ने यात्री से पूछताछ की तो उसने बताया कि यह पास ऋषिकेश डिपो के एक टाइम-कीपर ने उसे कुछ रकम लेकर दिया था। टाइम-कीपर ने यह भी बताया था कि बस में किराया नहीं लगेगा। टीम ने पास कब्जे में लेकर यात्री का ऋषिकेश से मुजफ्फरनगर तक का 127 रुपये का टिकट बना दिया। एजीएम हरिद्वार ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ऋषिकेश के एजीएम को रिपोर्ट भेजी। वहां से जांच की संस्तुति की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई। बताया गया कि जब्त किए गए पास में जो हस्ताक्षर हैं, वह ऋषिकेश के टाइम-कीपर के ही हैं। महाप्रबंधक दीपक जैन ने कहा कि जांच के बाद आरोपी टाइम-कीपर के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पहले से है भ्रष्टाचार की शिकायत जिस टाइम-कीपर पर फर्जी कुली पास बनाने का आरोप है, उसकी एक शिकायत पहले से मुख्यालय में लंबित है। बीते दो अगस्त को एजीएम ऋषिकेश नेतराम द्वारा की गई रिपोर्ट में टाइम-कीपर पर एक ही बस पर दो चालकों की हाजिरी दिखा वेतन जारी करने का आरोप है। 15 जुलाई को बस (यूके07-पीए-2523) पर नियमित चालक दिनेश कुमार की डयूटी थी और बस देहरादून से ऋषिकेश के लिए महज 46 किमी चली। टाइम-कीपर ने इसी बस पर नियमित चालक हरीश त्यागी की उपस्थिति भी दर्शायी। एजीएम ने भ्रष्टाचार का मामला बताकर टाइम-कीपर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की थी, लेकिन सांठगांठ के चलते मुख्यालय स्तर पर कोई कदम नहीं उठाए गए।

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