सुलह की आखिरी कोशिश नाकाम, आजम खान से मिले बिना लखनऊ लौटे मुलायम

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़| 1/3/2017 12:08:40 AM
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उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में मचा घमासान थमता नहीं नजर आ रहा है। समाजवादी पार्टी में वर्चस्‍व की जंग उस वक्‍त चुनाव आयोग की चौखट पर पहुंच गई, जब मुलायम सिंह यादव ने दिल्ली में आयोग के समक्ष पार्टी के चुनाव निशान साइकिल पर अपना दावा ठोंका। उधर, समाजवादी पार्टी में सुलह कराने की आखिरी कोशिश मंगलवार को उस वक्‍त नाकाम होती नजर आई जब मुलायम सिंह यादव आज दिल्‍ली में आजम खान से मुलाकात किए बिना लखनऊ के लिए रवाना हो गए। जानकारी के अनुसार, आजम खान के पहुंचने से पहले ही मुलायम आज दिल्‍ली में अपने घर से लखनऊ के लिए निकल गए। इस बीच, मुलायम लखनऊ पहुंच गए हैं। सपा के चुनाव चिन्‍ह साइकिल पर कब्‍जे की खींचतान के बीच उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान समाजवादी पार्टी में सुलह कराने की कोशिश के तहत मंगलवार को मुलायम सिंह से दिल्‍ली में मिलने वाले थे। सपा में सुलह कराने के लिए आजम खान आज दिल्‍ली पहुंचे और उनका दोनों पक्षों (मुलायम और अखिलेश) से बातचीत करने का कार्यक्रम था। बता दें कि अखिलेश के पार्टी से निष्‍कासन के बाद आजम खान ने ही पिता-पुत्र के बीच सुलह कराई थी। आजम की मध्‍यस्‍थता के बाद ही अखिलेश का पार्टी से निष्‍कासन रद्द किया गया था। अखिलेश की टीम भी मंगलवार को दिल्‍ली आ रही है। बताया जा रहा है कि अखिलेश की टीम आज चुनाव आयोग से दिन में 11.30 बजे मुलाकात करेगी। आयोग से मुलाकात के दौरान अखिलेश की टीम साइकिल चुनाव चिन्‍ह पर अपना दावा पेश करेगी। माना जा रहा है कि इस धड़े की ओर से राम गोपाल यादव आयोग के समक्ष पक्ष रखेंगे। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग साइकिल चुनाव चिन्‍ह को फ्रिज कर सकता है। बता दें कि मुलायम ने कल साइकिल चुनाव चिन्‍ह पर दावा किया था। साइकिल पर कब्‍जे के लिए खींचतान के बीच अब आजम मुलायम और अखिलेश दोनों पक्षों से बातचीत करेंगे। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में घमासान और कलह चरम पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग में जाने के साथ ही मुलायम ने उनके द्वारा पांच जनवरी को आहूत पार्टी अधिवेशन स्थगित कर दिया। ऐसा लगता है कि इस अंदेशे की वजह से उन्होंने यह अधिवेशन स्थगित किया कि कल लखनऊ में उनके बेटे अखिलेश के नेतृत्व वाले धड़े की ओर से बुलाए गए अधिवेश के मुकाबले उनके अधिवेशन में कम भीड़ होगी। अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाला धड़ा भी आज चुनाव आयोग से संपर्क कर साइकिल चुनाव निशान पर दावा ठोंकेगा। माना जा रहा है कि इस धड़े की ओर से राम गोपाल यादव आयोग के समक्ष पक्ष रखेंगे। चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने तक उसके इस मामले में दखल देने की संभावना नहीं है। मुलायम अपने भाई शिवपाल सिंह यादव, भरोसेमंद साथी माने जाने वाले अमर सिंह और पूर्व सांसद जया प्रदा के साथ सोमवार शाम दिल्ली में निर्वाचन सदन पहुंचे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम ने आयोग से कहा कि मैं अब भी समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष हूं और अखिलेश यादव को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त करने का विरोधी धड़े का फैसला पार्टी के संविधान के खिलाफ है। सूत्रों के अनुसार सपा संसदीय बोर्ड का समर्थन होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव निशान साइकिल उनका है क्योंकि वह पार्टी के अध्यक्ष हैं। मुलायम ने आयोग को बताया कि लखनउ में आपात अधिवेशन के दौरान अखिलेश को अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश करने वाले राम गोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया गया है और सपा के बारे में फैसले करने के लिए वह अधिकृत नहीं थे। उन्होंने कहा कि विरोधी धड़े के अधिवेशन में उनको अध्यक्ष पद से हटाने के लिए कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। मुलायम ने कहा कि सपा के संविधान के तहत इस तरह के फैसले के लिए संसदीय बोर्ड की मंजूरी जरूरी है। सूत्रों के अनुसार आयोग ने कहा कि इस विवाद को लेकर चुनाव चिन्ह :आरक्षण एवं आवंटन: आदेश-1968 के पैरा 15 का अनुसरण करेगा जो आयोग को मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के अलग हो गए समूहों या विरोधी समूहों के संदर्भ में फैसला करने का अधिकार देता है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों को चुनाव निशान पर दावा करना होगा नहीं तो आयोग को कैसे पता चलेगा कि कोई विवाद है। हम मीडिया की खबरों के जरिए आगे नहीं बढ़ते। साइकिल चुनाव निशान पर रोक लगाई जाती है तो आयोग दोनों पक्षों से नई पार्टी का नाम और चुनाव निशान तय करने के लिए कह सकता है।

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