मासूम बच्चियों को चुराने वाले गिरोह का भंडाफोड़

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़| 1/3/2017 1:31:30 AM
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बच्चियों को चुराने और फिर देह व्यापार के मकसद से उन्हें बेच देने वाला गैंग करीब चार साल तक मध्य प्रदेश के ग्वालियर में काम करता रहा और पुलिस को भनक तक नहीं लगी| जब गैंग की सरगना लक्ष्मी साईं बाबा मंदिर से बच्ची को चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई तो चौकाने वाले खुलासे हुए| बच्चियों को चुराने वाला ये गैंग ढाई से तीन साल की मासूमों को चुराता था फिर उन्हें खिला पिलाकर बड़ा करता था और मोटी रकम मिलने पर देह व्यापार के लिए बेच देता था| पुलिस ने गैंग के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि 7 ऐसी बच्चियां बरामद हुई हैं जिन्हें चुराने के बाद बेच दिया गया | एसपी डॉ. आशीष ने बताया कि गिरोह में सबसे अहम काम लक्ष्मी का था| लक्ष्मी पहले शहर के बस स्टैंड, स्टेशन या गरीब बस्तियों में जाकर उन बच्चियों को टारगेट करती थी, जिनके माता-पिता या तो घर से बाहर रहते थे या किसी वजह से बच्ची घर या मोहल्ले में अकेली खेलती थी| एसपी ने बताया कि,बच्ची टारगेट पर आ जाने के बाद लक्ष्मी उनसे चॉकलेट या फल खिलाने के जरिए पहचान बनाती और फिर मौका लगते ही उन्हें चुरा लेती| एक बार बच्चा चोरी होने के बाद लक्ष्मी के बेटे राजू और राजेश का काम शुरु होता था| ये दोनों बच्चियों की परवरिश करते थे और तब तक खिलाते-पिलाते थे जब तक की कोई ग्राहक इन्हें नहीं मिल जाता| मकसद यही होता था कि बच्चियों को इतना बडा कर लिया जाए कि देह व्यापार के लिहाज से मोटी रकम मिले| बच्चियों का सौदा करने का जिम्मा राम मिलन और रामनाथ बघेल के पास रहता था| ये दोनों लक्ष्मी से बच्चियों को लेते थे और फिर उन्हें 30 से 40 हजार रुपए तक बेच देते थे| आरोपियों से पूछताछ के बाद बेची गई सात बच्चियां मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग ठिकानों से बरामद हुई हैं| पुलिस के मुताबिक ये गैंग शहर में करीब चार साल से काम कर रहा था और हैरानी की बात ये है कि कुछ बच्चियां तो इतनी कम उम्र में चुराई गईं कि वो आरोपियों को ही अपना रिश्तेदार समझती हैं, फिलहाल पुलिस गैंग से और पूछताछ कर रही है ताकि इनकी और काली करतूतों का पता लगाया जा सके|

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