खिताब के बाद दिखा हॉकी का सुनहरा भविष्य

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़ 1/10/2017 1:52:09 AM
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भारतीय हॉकी टीम ने 15 साल बाद जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के खिताब पर कब्जा जमाकर देश को नये साल का एक शानदार तोहफा दिया है। विगत दिवस लखनऊ के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खेले गए पुरुषों के जूनियर विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल में भारतीय हॉकी टीम ने बेल्जियम को 2-1 से हराया। इतना ही नहीं भारतीय हॉकी टीम ने बेल्जियम को हर क्षेत्र में शिकस्त दी, चाहे वह गेंद पर नियत्रंण हो, कब्जा हो, रणनीति हो, डिफेंस हो या अटैक। भारतीय हॉकी टीम इस टूर्नामेंट में अजेय रही और उसने अपने सभी 6 मैचों में जीत दर्ज की। इससे पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारत ने अर्जेंटीना को हराकर इस खिताब पर अपना कब्जा जमाया था। जूनियर खिलाड़ियों की जीत ने भविष्य को लेकर नई आशा जगाई है क्योंकि यही खिलाड़ी सीनियर टीम का हिस्सा बनेंगे। एक मजबूत सेकेंड लाइन और एक कोर ग्रुप का तैयार होना भारतीय हॉकी के लिए सुखद एहसास है। जूनियर खिलाड़ियों में सभी ने इस टूर्नामेंट में बराबर दम-खम दिखाया। इनमें से आठ ने मौका मिलने पर गोल दागे। सीनियर हॉकी टीम हो या जूनियर या फिर महिलाओं की टीम, सबने हाल के दिनों में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय हॉकी अपनी लय में वापस आ रही है। दरअसल आज का दौर आधुनिक तकनीकों, फिटनेस और रणनीतिक हॉकी का है, जिसमें कोच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हाल में भारतीय हॉकी को संवारने में कई विदेशी कोचों का योगदान रहा। हालांकि उन्हें लेकर पिछले कुछ वर्षों में विवाद भी हुए। हॉकी इंडिया से तालमेल नहीं बना पाने की वजह से दो अच्छे विदेशी कोच बीच में ही छोड़कर चले गए। लेकिन इनके जाने के बाद भी डच कोच रोलैंट ओल्टमेंस लगातार टीम से जुड़े रहे, जिन्होंने टीम को एक प्रफेशनल रूप देने की लगातार कोशिश की है। ओल्टमेंस ने सबसे महत्वपूर्ण काम टीम की फिटनेस में सुधार करके किया है। भारतीय टीम अब किसी भी दिग्गज टीम की फिटनेस का मुकाबला कर सकती है। उसमें पूरे 60 मिनट तेज रफ्तार से खेलने की क्षमता आ गई है। पहले खराब फिटनेस की वजह से ही वह अक्सर आखिरी समय में ढीली पड़ जाती थी। पेनाल्टी कार्नरों को गोल में बदलने की उसकी कला और डिफेंस में भी बहुत सुधार हुआ है। भारतीय कोच भी अब इन चीजों पर फोकस कर रहे हैं। जूनियर टीम के कोच हरेन्दर ने टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया, उन्हें एकजुट रखा। हाल के दिनों में हॉकी इंडिया ने हॉकी के हित में कई बड़े कदम उठाए हैं, जिनका सकारात्मक असर दिखने लगा है। क्रिकेट की तरह हॉकी में भी कई बदलाव किए गए हैं। हॉकी इंडिया लीग से भारतीय खिलाड़ियों को अलग पहचान मिल रही है। छोटी-बड़ी जगहों से अच्छी-खासी संख्या में नौजवान अब हॉकी से जुड़ने के लिए आ रहे हैं। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि भारतीय हॉकी का सुनहरा दौर जल्दी ही लौटकर आने वाला है।

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