मकरसक्रांति पर्व पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी

विपुल अग्रवाल ,पोलखोल न्यूज़, देहरादून 1/13/2017 11:58:30 PM
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मकर संक्रांति पर्व पर र्धमनगरी में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायनी गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। इस दौरान उन्होंने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। हरकी पैड़ी, वीआइपी घाट, कुशावर्त घाट, बिरला घाट सहित अन्य घाटों पर स्नान, दान व तर्पण का सिलसिला पुण्यकाल के समय से जारी रहा। सबसे अधिक भीड़ हरकी पैड़ी व बिरला घाट पर लगी रही। गंगा के किनारे स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने खिचड़ी का वितरण किया गया। दूसरी तरफ , उत्तरकाशी में मकर संक्रांति पर्व पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायनी गंगा (भागीरथी) में पुण्य की डुबकी लगाई। मकर सक्रांति (मकरैंण) पर इस बार वर्षों बाद सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग सभी 12 राशि वालों के लिए विशेष फलदायी है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने (उत्तरायण होने) के साथ ही मलमास खत्म हो जाएगा। इसी के साथ ही शुरू हो जाएंगे गृह प्रवेश, विवाह आदि मांगलिक कार्य। ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांतराज ने बताया कि स्थानीय पंचांग गणना के अनुसार आज दोपहर 1.55 बजे सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पुण्य काल पूरे दिन का है। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर शाम तक आप स्नान-दान जैसे पुण्य कार्य कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस पर्व पर अन्नदान, खासकर उड़द की खिचड़ी का विशेष महत्व है। इसलिए इसे खिचड़ी संग्रांद भी कहते हैं। खरीदारी के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है। मकर सक्रांति से सूर्य की गति उत्तर की ओर हो जाती है। इसे अच्छे दिनों की शुरूआत होना माना जाता है| आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी के अनुसार इस दिन सूर्य की किरणों का प्रभाव भी अन्य दिनों के मुकाबले अधिक होता है। जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। गंगा-यमुना आदि पवित्र नदियों के जल में स्नान कर सूर्य उपासना करने से किरणें और बल प्रदान करती हैं। शास्त्रों में दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। उत्तरायण को सकारात्मकता का। उत्तरायण काल को ही साधना का सिद्धिकाल कहा गया है। सूर्य की सातवीं किरण का प्रभाव भारत में गंगा-जमुना के मध्य अधिक समय तक रहता है। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन भी हरिद्वार और प्रयाग में विशेष उत्सव होता है। श्रद्धालु गंगा में स्नान कर सूर्यदेव की उपासना करते हैं| मकर संक्रांति को पतंग उड़ाने का रिवाज भी है। युवाओं समेत सभी वर्गों में पतंग उड़ाने को लेकर खासा उत्साह होता है। पतंग उड़ाने को लेकर पौराणिक कथा भी है। तुलसीदास ने रामचरित मानस में इसका जिक्र किया है। परंपरा के अनुसार , मकर संक्रांति के दिन भगवान राम ने पतंग उड़ाई तो वह इंद्रलोक पहुंच गई। इंद्र की पुत्रवधू ने जब पतंग देखी तो डोर तोड़कर उसे अपने पास रख लिया। भगवान राम ने हनुमान को पतंग लाने के लिए भेजा। परंतु , इंद्र की पुत्रवधू ने कहा कि श्रीराम को देखने के बाद ही पतंग लौटाएंगी। हनुमान ने यह संदेश भगवान श्रीराम को सुनाया। तब श्रीराम ने हनुमान के माध्यम से संदेश भेजा कि वनवास के दौरान वह उसे दर्शन देंगे। इस आश्वासन पर इंद्र की पुत्रवधू पतंग लौटाने को राजी हुई।

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