बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं को मनाने में जुटी कांग्रेस

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़ 1/25/2017 11:16:50 PM
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कांग्रेस ने बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं को मनाने का जिम्मा पार्टी में उनके पैरोकार नेताओं को ही सौंपा है| पार्टी के बड़े नेता जिन बागियों को टिकट देने की सिफारिश कर रहे थे, अब वे ही समझाने का काम करेंगे| इसके लिए पार्टी ने पहले ही दावेदारों के बायोडाटा और सूची में उन नेताओं के नाम भी लिख लिए थे| दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय में लगातार टिकट पाने में नाकाम रहे दावेदारों के फैक्स और शिकायती चिट्ठियां पहुंच रही हैं| पंजाब के बाद अब उत्तराखंड में भी बागियों को समझाओ-बुझाओ पर काम शुरू हो गया है| कांग्रेस के बागियों और दलबदल करने वालों से निपटने के लिए अनोखी रणनीति कारगर साबित हो रही है| हर बार टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में अधिकृत उम्मीदवार को विरोधी दल से अधिक अपनों के विरोध का सामना करना पड़ता था| इसी को ध्यान में रखकर पार्टी ने इस बार पांच राज्यों के लिए फार्मूला निकाला था| पैनल में शामिल प्रमुख दावेदारों के लिए कौन नेता पैरवी कर रहा है इसका उल्लेख भी उसके नाम के सामने किया गया है| बगावत करने वाले या पार्टी का नुकसान पहुंचाने वाले को समझाने और साथ जोड़े रखने का जिम्मा उन्हीं नेताओं पर होगा| पार्टी के सामने फिलहाल उत्तराखंड बड़ी चुनौती है| बागियों के खुलकर विरोध करने को पार्टी चुनाव में नुकसान मानती है| देहरादून स्थित प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ पर आलाकमान चिंतित है| प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की सहसपुर सीट पर बगावत के स्वर सुनाई दे रहे हैं| वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम घोषित होने के बाद वहां से दावा ठोंक रहे जिला पंचायत अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी है| कुमाऊं की गदरपुर सीट पर भी गदर मचा है यहां परिवारवाद की शिकायत सामने आई है| सितारगंज में भी दमदार दावेदार रहे नेता अधिकृत उम्मीदवार का नुकसान कर सकते हैं| रामनगर सीट पर भी पार्टी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है| गढ़वाल में भी विरोध तेज हैं| लक्सर सीट पर सैनी समाज ने पंचायत कर अंतरिक्ष सैनी को लड़ाने की तैयारी कर ली है| रायपुर में पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारा है लेकिन संभावित एक नाम पर राय बनते ही जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है| ज्वालापुर में पिछली बार कम अंतर से हारी ब्रजरानी निर्दलीय उतरने की तैयारी में हैं| खानपुर पर विरोध हो रहा है| मुख्यमंत्री के करीबी कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह की नाराजगी भी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है| लिहाजा इसका जिम्मा हरीश रावत पर है|

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