11 मार्च को इस्तीफा दे सकते है मुख्यमन्त्री हरीश रावत

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 2/28/2017 11:18:32 PM
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11 मार्च को मुख्यमन्त्री हरीश रावत राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। दरअसल चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचित विधायकों की अधिसूचना जारी होने के बाद संविधान की परम्परा के मुताबिक नई सरकार के गठन के लिये हरीश रावत को ऐसा करना पड़ेगा। हालांकि राज्यपाल नई सरकार के गठन तक उन्हें पद पर बने रहने को कह सकते हैं। प्रदेश में नई सरकार के गठन के लिये सरकारी मशीनरी तैयार हो गयी है। विधायकों के ठहरने से लेकर विधानसभा में होने वाली गतिविधियों के लिये प्लान तैयार किया जा रहा है। उत्तराखंड में नई सरकार की राजनीतिक चहल-पहल 11 मार्च को शुरू होगी, लेकिन सरकारी मशीनरी अपना होमवर्क पूरा कर रही है। नई सरकार गठन के लिये शासन से लेकर विधानसभा तक तैयारी की जा रही है। निर्वाचन आयोग 11 मार्च या 12 मार्च को जब नये विधायकों के निर्वाचित होने की अधिसूचना जारी करेगा तभी नयी विधानसभा का गठन हो जायेगा। संवैधानिक व्यवस्था के तहत मुख्यमन्त्री और कैबिनेट के सदस्यों को राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाई जाती है। जबकि विधानसभा सदस्यों को प्रोटेम स्पीकर शपथ दिलायेंगे. प्रोटेम स्पीकर के चयन पर राज्यपाल अपनी मुहर लगायेंगे। संवैधानिक व्यवस्था के तहत नये स्पीकर का चुनाव भी प्रोटेम स्पीकर ही कराते हैं। उत्तराखंड विधानसभा में इसके लिये तैयारी शुरू हो गयी है। विधानसभा सचिव जगदीश चन्द्र कहते हैं कि मुख्यमन्त्री और उनका मंत्रिमंडल सामान्यत: राजभवन में शपथ लेता है, जबकि बचे हुये विधायकों को विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर द्वारा शपथ दिलाई जाती है। विधानसभा में संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक तैयारी की जा रही है। सत्तर सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में 15 फरवरी को 69 सीटों के लिये मतदान हुआ और शेष बची एक सीट पर 9 मार्च को वोटिंग होगी। जबकि मतगणना एक साथ 11 मार्च को होगी। नये विधायकों के लिये शासन स्तर पर भी तैयारी चल रही है। नई सरकार के मन्त्रियों और विधायकों के रहने का भी इंतजाम किया जा रहा है। राज्य सम्पत्ति अधिकारी विनय शंकर पांडेय के मुताबिक एमएलए हॉस्टल, सर्किट हाउस, ऑफिसर्स हॉस्टल और बीजापुर गेस्ट हाउस में खास इंतजाम राज्य सम्पत्ति विभाग की ओर से किये जा रहे हैं। सरकार किसकी बनेगी और विधायकी का चुनाव कौन जीतेगा ये तो 11 मार्च को ही तय होगा, लेकिन सरकारी मशीनरी माननीयों की आवभगत में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती। यही वजह है कि शासन के बड़े अधिकारी भी इस मामले पर अभी से होमवर्क कर रहे हैं।

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