छात्रवृत्ति घोटाले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा: यशपाल

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 3/24/2017 10:36:03 PM
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समाज कल्याण विभाग का जिम्मा संभालने के बाद कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि सत्र 2014-15 व 15-16 में आधे से भी कम छात्रों को छात्रवृत्ति आवंटित की गई, जबकि विभाग के पास पर्याप्त राशि थी। इसके साथ ही अपात्र छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के मामले भी उठे। इन तमाम मामलों की जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही आगामी सत्र से सभी पात्र छात्रों को समय से छात्रवृत्ति मिलना सुनिश्चित कराया जाएगा। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद जागरण से बातचीत में परिवहन और समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा का समान हक प्रदान करने के लिए समग्र प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीते दो सत्रों में हुए छात्रवृत्ति घोटालों की जांच कराने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हित के लिए मौजूदा योजनाओं को सुचारु संचालन के साथ नई योजनाएं भी तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही तमाम विभागों में रिक्त बैकलॉग के पदों पर तैनाती की प्रक्रिया को जल्द शुरू कराने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग की कार्यशैली को ढर्रे पर लाना एक चुनौती है और यही पहली प्राथमिकता रहेगी। उधर, परिवहन निगम और विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर आर्य ने कहा कि विभाग में तमाम स्तर पर भ्रष्टाचार सामने आता रहा है। इसे समाप्त किया जाएगा। इसके लिए सबसे पहले लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों के प्रकरण देखे जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों के तबादलों की जरूरत पड़ी तो वह भी किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के साथ द्वेष भावना से फैसला नहीं लिया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही कार्रवाई होगी। परिवहन मंत्री ने कहा कि घाटे में चल रहे परिवहन निगम को घाटे से बाहर लाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। हल्द्वानी और देहरादून स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डों को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे बस अड्डों को विकसित किया जाएगा। इन दोनों आइएसबीटी में कथित अनियमितताओं की भी सरकार जांच कराएगी। पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन का जिम्मा निजी बसों पर है। इसे भी विभाग के माध्यम से मजबूत किया जाएगा। निगम के पास कर्मचारियों को देने के लिए वेतन तक नहीं है, ऐसे में अनुबंध पर मोटी राशि खर्च किए जाने के बजाय विभाग की बसें संचालित करने पर जोर रहेगा।

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