प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन न करने पर प्रतिष्ठान सील

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़, हरिद्वार 3/28/2017 10:28:30 PM
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हाईकोर्ट तथा एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन न करने पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की लालकोठी और दो होटलों समेत पांच प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। दो अलग-अलग टीमें गठित कर प्रशासन ने सिलिंग की कार्रवाई शुरू की। एसडीएम मनीष जरोशी तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. पीके जोशी की अगुवाई वाली टीम ने सबसे पहले श्रवणनाथ नगर स्थित होटल शिवा पैलेस को सील किया। होटल का पूरा भवन सील करने की बजाए बिजली पानी का कनेक्शन काटकर ऑपरेटिंग कक्ष पर सील लगा दी। डा. जोशी ने बताया कि होटल के प्रबंधकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं लेने के कारण नोटिस दिया गया था। उन्होंने न तो अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया न ही नोटिस का जवाब दिया। होटल मालिकों का कहना था, कि वे इसके लिए आवेदन कर चुके हैं और पेनाल्टी समेत शुल्क भी जमा कर चुके हैं। उनकी फाइल देहरादून स्थित कार्यालय में लंबित है। होटल मालिकों की तरफ से होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, प्रदीप कालरा, संदीप शर्मा आदि भी पैरवी करने पहुंचे, लेकिन सिलिंग की कार्रवाई कर दी गई। इसके बाद टीम ने औद्योगिक क्षेत्र हरिद्वार में स्थित एक मोटर वर्कशॉप हाईटेक स्पेयर्स को भी सील कर दिया। टीम में बोर्ड के अभियंता आरके चतुर्वेदी तथा अनुराग नेगी, कोतवाली प्रभारी अनिल जोशी तथा एसएसआई पंकज देवरानी आदि शामिल रहे। दूसरी तरफ नगर आयुक्त अशोक पांडेय और जलसंस्थान की अनुरक्षण इकाई के अधिशासी अभियंता अजय कुमार की अगुवाई में गठित दूसरी टीम ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन वाले अतिथि गृह लाल कोठी, चंडीघाट पुल के पास स्थित उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम के कैंप कार्यालय तथा उत्तरी हरिद्वार स्थित होटल विवेक को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना था, कि इन सभी प्रतिष्ठानों में प्रदूषण नियंत्रण के मानक पूरे नहीं किए गए थे। होटलों और धर्मशालाओं के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर सील करने की कार्रवाई को उत्पीड़नात्मक बताते हुए भाजपा नेता और होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कुछ अधिकारी अपनी मनमानी और लापरवाही छिपाने के लिए होटल और धर्मशाला संचालकों का उत्पीड़न कर रहे है। आशुतोष ने कहा कि ऐसे लोगों के प्रतिष्ठान भी सील किए जा रहे हैं, जो प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवेदन कर चुके हैं। पैसे भी जमा कर चुके हैं लेकिन अधिकारी उन्हें जानबूझकर अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दे रहे हैं। कई महीनों से फाइलें दफ्तरों में फंसी हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही की सजा होटल मालिकों को नहीं दी जानी चाहिए। ऐसी कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिलकर मनमानी कर रहे अधिकारियों की शिकायत करेगा।

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