एनएच 74 घोटाला बना अधिकारियों व सफेदपोशों के गले की हड्डी

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 3/30/2017 2:04:31 AM
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रफी खान, पोलखोल न्यूज, काशीपुर। कांग्रेस राज का सबसे बड़ा घोटाला अब अधिकारियों और सफेदपोशों के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है जो ना उगलते बन रहा है और ना निगलते। ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 लेंडयूज बदलने को लेकर हुए घोटाले की जडे़ लगातार गहरी होती जा रही हैं। जांच जैसे-जैस आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे घोटालों की परतें खुलती जा रही हैं। शुरूआती जांच में 118 करोड़ का दिखने वाला घोटाला अब 300 करोड़ का आंकडा छूता नजर आ रहा है। इसके आंकड़े के और ऊपर जाने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है। यहां बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग 74 से जुड़े इस घोटाले को सबसे पहले प्रदेश के चर्चित अखबार देवभूमि पोलखोल ने वर्ष 2015 के 14 जुलाई के प्रकाशित अंक में मुआवजे के नाम पर केंद्र सरकार को अरबो का चूना नामक खबर शीर्षक से उजागर किया था तब से लेकर आज तक यह घोटाला अखबारों से लेकर सोशल मीडिया की सुर्खिया बना हुआ है। भूमि अधिगृहण घोटाले की परतें अब परत दर परत खुलती नजर आ रही हैं, उच्च स्तरीय जांच के साथ ही बीते सप्ताह प्रदेश के सीएम द्वारा मामले में सीबीआई जांच कराये जाने की बात कहने के उपरांत घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है इसका जीता जागता सुबूत है कि जहां एक तरफ फाईलों में लिपापोती की जा रही है तो वहीं कुछ महत्वपूर्ण फाईलें भी तहसीलों से गायब कर दी गयी है काबिले गौर है कि जसपुर एसडीएम कार्यालय से इन्हीं मामलों से संबंधित डेढ़ दर्जन फाईलें गुम बताई जा रही है। जिससे करोड़ों के घोटालें में अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच मंे कई अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्ता का अंदेशा है। वर्ष 2011 से लेकर अब तक कई पीसीएस अधिकारी और कर्मचारियों के साथ ही एनएच के अधिकारी भी संदेह के दायरे में बताये जा रहे हैं। यह साफ हो गया है कि सिर्फ एक विभाग या एक अधिकारी नहीं बल्कि कई स्तर से फर्जीवाड़े और अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं। मामले की त्रिस्तरीय जांच चल रही है जिसमें दो सौ से भी ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी निशाने पर हैं। वहीं इस घोटाले में एनएचआई के अफसरों की भी मिलीभगत सामने आ रही है, क्योंकि उन्होंने किसी भी फाइल पर आपत्ति तक नहीं की और एसएएलओ द्वारा पारित अभिनिर्णय के अनुसार ही मुआवजा राशि जारी कर दी। दरअसल नैनीताल ऊधमसिंह नगर के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद पर पर 2012 से अब तक दस एसएएलओ के पद पर दस अफसरों की तैनाती हो चुकी है। 13 जून 2012 को अशोक कुमार जोशी की एसएएलओ के पद पर नियुक्ति हुई जो 22 अक्टूबर 2013 तक तैनात रहे। 23 अक्टूबर को कार्यभार संभाला शिवचरण द्विवेदी ने, जो दो जनवरी 2014 तक तैनात रहे। इसके बाद दो जनवरी को ही मोहम्मद नासिर ने कार्यभार संभाला। उनका कार्य 18 जनवरी तक ही रहा। 19 जनवरी को यह कार्यभार चंद्र सिंह ने संभाला। 13 जुलाई 2014 को उनका तबादला हो गया। उसके बाद 14 जुलाई तीर्थपाल को कार्यभार सौंपा गया। वह 22 अगस्त तक एसएएलओ के पद पर रहे। इला गिरी का कार्यकाल 23 अगस्त 2014 से 25 नवंबर 2014 तक रहा। उसके बाद चंद्र सिंह मर्तोलिया ने 21 दिसंबर को कार्यभार संभाला और वह आठ जनवरी 2015 तक तैनात रहे। नौ जनवरी 2015 को कार्यभार संभाला अनिल कुमार शुक्ला ने जो 17 जनवरी 2016 तक तैनात रहे। 18 जनवरी 2016 को डीपी सिंह ने कार्यभार संभाला जो 15 मार्च 2017 तक रहे। उसके बाद एनएस नबियाल को यह जिम्मा सौंपा गया है। इस दौरान एपी बाजपेई अपर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद पर सात जुलाई 2016 से 12 अगस्त 2016 तक तथा चंद्र सिंह इमलाल भी इसी पद पर 16 अगस्त 2016 से 23 अगस्त 2016 तक तैनात रहे। ऊधमसिंहनगर जिले में एनएच 74 के चैड़ीकरण में हुए करोड़ों के घोटाले का मामला लगातार ही चर्चा में है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 काशीपुर सितारगंज अनुभाग का प्रथम गजट नोटिफिकेशन पांच जुलाई 2013 को और द्वितीय गजट नोटिफिकेशन 3 एक 19 मार्च 2014 को हुआ। इसके साथ ही प्रथम 3 डी नोटिफिकेशन 25 फरवरी 2014 और द्वितीय 3 डी नोटिफिकेशन को हुआ। अगर बात करें अभिनिर्णय पारित करने की तो ग्राम कनौरी में आठ अगस्त 2014, कनौरा में सात मार्च 2015, महेशपुरा में पांच फरवरी 2015, हरलालपुर में एक अगस्त 2014, गुमसानी आठ अगस्त 2014, ताली नौ नवंबर 2015, बिचपुरी 23 अगस्त 2014, टांडा आजम में 26 सितंबर 2014, भव्वा नंगला एक अगस्त 2014, केलाखेड़ा 28 अगस्त 2014, मुंडिया मर्न 23 मार्च 2015, रत्ना की मंडिया 21 जनवरी 2015, फतेहगंज 21 फरवरी 2015, मसीत 29 अगस्त 2014, पत्थरकुई 26 सितंबर 2014, मुंकुंदपुर 30 अगस्त 2014, गोपालनगर 27 सितंबर 2014, बरी राई 30 अक्टूबर 2014, अलखदेई 23 अगस्त 2014, बराखेड़ा 17 मार्च 2015, मोतियापुरा नौ जनवरी 2015, झगड़पुरी 30 अगस्त 2014, पिपलिया गदरपुर दो मार्च 2015, बूरानगर 20 अप्रैल 2015, महतोष 16 अप्रैल 2015, खानपुर 21 अप्रैल 2015, जाफरपुर 12 मई 2015, दानपुर छह मई 2015, रुद्रपुर 22 मई 2015, चुटकी 22 मई 2015, लालपुर 12 मई 2015, रम्पुरा 13 अप्रैल 2015, बगवाड़ा 22 मई 2015, सिरौली कलां 27 अप्रैल 2015, पिपलिया किच्छा 11 जुलाई 2014, कोठा, किशनपुर व सिरौली खुर्द 11 जुलाई 2014, भमरौला सात जुलाई 2015, भंगा 10 जुलाई 2015, कोलडिया 11 मई 2015, शिमला पिस्तौर छह मई 2015, बरा 27 अप्रैल 2015, नकहा 11 मई 2015, कुंवरपुर पांच मई 2015, कठंगरी छह मई 2015, सिसैया पांच मई दढ़हा आठ जुलाई 2014, गोठा 27 मई 2014, मखबारा 10 जुलाई 2014, लौका 11 जुलाई 2014 एवं गौरीखेड़ा सात अप्रैल 2016 को हुआ। वहीं कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने इस संबंध में कहा कि अब तक की जांच में सरकार को 170 करोड़ के वित्तीय हानि का मामला सामने आया है। घोटाले को सिंडिकेट बना कर अंजाम दिया गया है। जांच में हासिल हुए दस्तावेजों के आधार पर तैयार तथ्यात्मक रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि अधिकारियों द्वारा रिकार्ड में हेराफेरी करते हुए कृषक भूमि को व्यवसायिक में परिवर्तित कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का काम किया गया है। योजनाब( तरीके से एनएस 74 व 87 के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधित मामले को अंजाम दिया गया जिसमे सरकार के साथ ही गैर सरकारी लोग भी शामिल है। सवाल यह उठ रहा है कि एनएच के चैड़ीकरण व मुआवजे के वितरण को लेकर समय-समय पर उच्चाधिकारियों द्वारा समीक्षा बैठकें की जाती रहीं, लेकिन चार सालों तक यह खेल पकड़ में क्यों नहीं आया? कहीं न कहीं इस मामले में अधिकारियों को सफेदपोशों का संरक्षण रहा जिसके चलते सालों से घोटाले को दबाये रखा गया। <आखिर कौन निगल रहा है एनएच से जुड़ी फाइलों को>- एनएच से जुड़ी 14 फाइलें जसपुर से गायब होने के बाद काशीपुर एसडीएम कार्यालय से भी गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। जहां से एनएच मुआवजे से जुड़ी पांच फाइलें गायब हैं। यहां बता दें कि एसडीएम दयानंद सरस्वती व तहसीलदार संजय कुमार ने जांच के दौरान एनएच से जुड़ी फाइलों को खंगालना शुरू किया तो पांच फाइलें नहीं मिली। जसपुर के बाद काशीपुर से भी फाइले गायब होने की खबर से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया जिसके बाद एसडीएम नेआइटीआई थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर अब तो हद ये हो गयी है कि जांच से संबंधित फाईलों को शातिर चोरों के माध्यम से चोरी करवायी जा रही है। नेशनल हाईवे भूमि अधिगृहण के तीन सौ करोड़ से भी अधिक के घोटाले की कई महत्वपूर्ण फाईलें और कम्प्यूटर एसडीएम कोर्ट से चोरी हो गये। बीती 26 मार्च की देर रात चोरों ने काशीपुर एसडीएम कोर्ट परिसर में घुस कर ताले तोड़ दिये और कोर्ट की कई अलमारियों को खंगाला और कई फाईलों के साथ ही एक कम्प्यूटर भी चोरी कर दिया गया। चोरी कि सूचना मिलते ही एसडीएम मौके पर पहुंचे और पुलिस को बुलाकर चोरी की रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। जहां मामले की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि एनएच घोटाले से जुड़ी फाईलों का मुख्यालय में होने की बात कहकर एसडीएम दयानंद सरस्वती ने बताया कि चोर घोटाले से जुड़ी फाईलों की चोरी की मंशा से आये थे मगर वो फाईलें उन्हें नहीं मिली है।

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