फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति में घपले की जांच शुरू

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़ 3/31/2017 10:08:00 PM
img

वर्ष 2015 में फर्जी छात्रों के नाम पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी को उत्तराखंड सरकार के स्कॉलरशिप देने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ था। इसके अलावा छात्रवृत्ति के अन्य मदों में भी करोड़ों बांटने पर समाज कल्याण निदेशालय पर अंगुली उठती रही है। कांग्रेस सरकार में तीन साल के दौरान करीब सवा सौ करोड़ का वजीफा बांटने की जांच भाजपा सरकार ने शुरू करा दी है। वजीफा में हुए फर्जीवाड़े की जांच के लिए समाज कल्याण विभाग को बाहर रखा गया है। सूबे के सभी 13 जिलों में जांच का जिम्मा सीधे जिलाधिकारी को सौंपा गया है। समाज कल्याण निदेशालय और शासन स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पूर्व सरकार में वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में करीब सवा सौ करोड़ का वजीफा बांटा गया है। वर्ष 2016-17 में छात्रवृत्ति का बजट आना बाकी है। राज्य सरकार ने पूर्व शासन में इन तीन साल के दौरान बांटी गई स्कॉलरशिप की जांच शुरू करा दी है। जांच को पारदर्शिता के साथ पूरी करने के लिए समाज कल्याण विभाग को तफ्तीश से पूरी तरह से बाहर रखा गया है। सूबे में जांच की बागडोर डीएम को सौंपी गई है। इस बाबत सचिव भूपिंदर कौर औलख की तरफ से समाज कल्याण निदेशालय को भी फरमान जारी कर दिए गए हैं। समाज कल्याण के निदेशक वीएस धानिक का कहना है, कि प्रदेश में पिछले तीन साल में बांटी गई स्कॉलरशिप देने का सत्यापन वैसे विभाग करता रहा है, लेकिन शासन के निर्देश पर इस बार सघन जांच होनी है। यह जिलाधिकारी स्तर से होनी है। सहारनपुर की स्कॉलरशिप की भी फिर से जांच शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के तमाम शैक्षिक संस्थाओं के 100 करोड़ के वजीफा का फर्जी भुगतान का प्रकरण भी वर्ष 2015 में सुर्खियों में था। समाज कल्याण निदेशालय ने इसकी भी जांच कराई और सब कुछ ठीक-ठाक बताते हुए फाइल को बंद कर दिया गया था। राज्य में नई सरकार बनते ही इस प्रकरण की फिर जांच शुरू करा दी गई है। समाज कल्याण के अपर सचिव डॉ. वी. षणमुगम् को इस प्रकरण की जांच सौंपी गई है। प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए देहरादून और हरिद्वार के समाज कल्याण अधिकारियों से रिकार्ड तलब किए जा चुके हैं। दोनों ही जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों ने रिकार्ड देने में पहले विलंब किया था, इसे लेकर सहायक निदेशक व नोडल अधिकारी आइटी सेल केआर जोशी इस लापरवाही के लिए पूर्व में लिखा-पढ़ी भी की थी।

Advertisement

img
img