एसजीएसटी बिल जून में हो सकता है पेश

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 4/4/2017 10:05:54 PM
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प्रदेश में एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम लागू हो जाएगा। इससे पहले उसे विधानसभा में स्टेट जीएसटी बिल पारित कराना होगा। केंद्र सरकार ने राज्य को मॉडल एक्ट का प्रारूप भेज दिया है। हिंदी के प्रारूप में त्रुटियां होने की वजह से सरकार ने उसे केंद्र को संशोधन के भेजा है। इसके लौटने के साथ ही सरकार अधिनियम बनाने की तैयारी में जुट जाएगी। सरकार मई महीने के आखिर या जून माह के पहले पखवाड़े में विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकती है। यह भी मुमकिन है सरकार जून माह में बजट सत्र बुलाकर सदन में एसजीएसटी बिल पेश कर दे। जीएसटी परिषद की बैठक में राज्य के सरोकारों से जुड़े तकरीबन सभी मुद्दों पर निर्णय हो चुका है। अब सरकार के सामने इसे तय समय पर लागू करने की चुनौती है। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक जुलाई की तिथि निर्धारित की है। प्रदेश सरकार को हिंदी और अंग्रेजी भाषा में मॉडल एक्ट के प्रारूप भेजे गए हैं। इन प्रारूप के आधार पर सरकार विधेयक तैयार करेगी और पहले इस पर कैबिनेट से अनुमोदन होगा। इसके बाद उसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। लेखानुदान की अवधि चूंकि जून माह में समाप्त होनी है, इसलिए उससे पहले बजट सत्र बुलाए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार सरकार मई आखिर या जून महीने में विशेष सत्र या बजट सत्र आयोजित कर एसजीएसटी बिल को मंजूर करा सकती है। एसजीएसटी एक्ट लागू होने के साथ ही प्रदेश में मूल्य वर्धित कर (वैट), बिक्री कर, मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए गए टैक्स को छोड़कर), चुंगी व प्रवेश कर, लग्जरी कर समाप्त हो जाएगा। नई कर व्यवस्था से राज्य सरकार को बहुत ज्यादा लाभ होने की संभावना नहीं है। अलग-अलग करों से हो रही आय की तुलना में राज्य सरकार को चार से पांच फीसदी बढ़ोत्तरी का लाभ मिलेगा। ये राशि 200 से 250 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होने का अनुमान है। एसजीएसटी अधिनियम लागू करने के लिए प्रदेश सरकार के स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी के मुताबिक, नए कर प्रणाली के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। अब तक 70 फीसदी व्यापारिक प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन पंजीकरण हो चुका है। जीएसटी के दायरे में आने वाले वर्ग के प्रतिनिधियों को जागरूक करने के लिए सरकार के स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित हो रही हैं। आगामी 11 अप्रैल को एक और कार्यशाला रखी गई है, जिसमें सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि को बुलाया गया है। केंद्र ने एसजीएसटी बिल के हिंदी व अंग्रेजी में मसौदे भेजे हैं। इनमें हिंदी वाले मसौदे में कुछ खामियां हैं। चूंकि हिंदी भाषी राज्यों में इसी मसौदे के अनुरूप अधिनियम बनना है, लिहाजा प्रदेश सरकार ने इसे संशोधन के लिए केंद्र सरकार को लौटाया है। केंद्र से त्रुटियाें में सुधार के बाद सरकार इसे विधेयक का रूप देने में जुट जाएगी।

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