64 स्टेट हाईवे मार्ग हुए जिला मार्ग घोषित

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 4/8/2017 12:20:32 AM
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राज्य मंत्रिमंडल की हुई बैठक में नगर निकायों के अंतर्गत सभी स्टेट हाईवे की श्रेणी को बदलकर अन्य जिला मार्ग घोषित करने पर मुहर लगाई गई। नेशनल और स्टेट हाईवे से शराब की दुकानों की शिफ्टिंग के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आबकारी राजस्व को मिले झटके का तोड़ राज्य सरकार ने निकाल लिया है। मंत्रिमंडल के इस फैसले से 64 मार्ग अब स्टेट हाईवे के दायरे से बाहर हो गए हैं। अब इन मार्गों पर मौजूद शराब की दुकानों को अन्यत्र शिफ्ट करने की बाध्यता से सरकार को निजात मिल सकेगी। मंत्रिमंडल ने अन्य महत्वपूर्ण फैसले में किसानों को कृषि कार्यों के लिए पांच लाख तक लोन में कृषि भूमि को बंधक बनाने पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी में छूट की सीमा अगले पांच वर्ष तक मिलेगी। सचिवालय में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्य रूप से हाईवे से शराब की दुकानों की शिफ्टिंग से आबकारी राजस्व को हुए नुकसान से निपटने को विकल्प पर मंथन हुआ। मंत्रिमंडल के फैसले ब्रीफ करते हुए मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने बताया कि राज्य के सभी नगर निकायों (नगर निगमों), नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों के अंतर्गत स्टेट हाईवे का हिस्सा अब स्टेट हाईवे नहीं कहलाएगा। इन्हें अन्य जिला मार्ग घोषित किया गया है। मंत्रिमंडल ने माना कि नगर निकाय क्षेत्रों में आबादी बढ़ गई है और इनके अंतर्गत मार्गों को दोनों ओर चौड़ीकरण समेत विकास कार्यों को अंजाम देना मुमकिन नहीं है। मार्ग में सीवर लाइन, नाली, बिजली खंभे, ट्रांसफार्मर, टेलीफोन लाइन, स्थानीय निकाय के होर्डिंग होने से इन मार्गों के विशेष भागों के रखरखाव व हाईवे की विशिष्टता को बरकरार रखने में व्यावहारिक कठिनाइयां पेश आ रही हैं। मंत्रिमंडल के इस फैसले से ऐसे 64 मार्ग अब स्टेट हाईवे के स्थान पर अन्य जिला मार्ग बन गए हैं। उक्त मार्ग राज्य के 63 नगर निकायों के अधीन हैं। गौरतलब है कि राज्य में कुल 92 नगर निकाय हैं। मंत्रिमंडल के इस कदम से स्टेट हाईवे के तौर पर 150 से ज्यादा शराब की दुकानों की शिफ्टिंग की नौबत नहीं आएगी। मंत्रिमंडल ने किसानों के हित में भी फैसला लिया। किसानों को पांच लाख तक ऋण के लिए कृषि भूमि को बंधक रखने पर लग रही स्टांप ड्यूटी माफ की गई है। यह व्यवस्था बीती 31 मार्च तक लागू थी लेकिन नए वित्तीय वर्ष शुरू होते ही यह व्यवस्था खत्म हो गई। मंत्रिमंडल ने यह छूट अब अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दी है। राज्य में अब केंद्र सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत उड़ान भरने वाली हवाई सेवा पर ही एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) में वैट पर एक फीसद छूट मिलेगी। ऐसी हवाई सेवाओं पर एटीएफ पर वैट 20 फीसद के बजाए सिर्फ 19 फीसद देना पड़ रहा है। राज्य की आमदनी के संसाधनों को बढ़ाने के लिए हाथ-पांव मार रही सरकार ने अब राज्य में सामान्य हवाई सेवा और चार्टर्ड प्लेन से यात्रा एटीएफ में दी जाने वाली ये छूट समाप्त कर दी है। इससे सामान्य हवाई सेवा और चार्टर्ड प्लेन से यात्रा महंगी हो जाएगी। उन्हें एटीएफ पर 20 फीसद वैट देना होगा। वहीं राज्य के भीतर हवाई सेवा संचालित करने वाली उड्डयन कंपनियों को एटीएफ में छूट मिलती रहेगी। मंत्रिमंडल ने राजभवन में अन्य महकमों से लगे कार्मिकों के संविलियन की अवधि में इजाफा किया है। इसके लिए संबंधित नियमावली में संशोधन पर मुहर लगाई गई। अन्य महकमों से राजभवन सचिवालय में कार्मिकों के लिए संविलियन की कट ऑफ डेट 30 सितंबर, 2010 को बढ़ाकर एक फरवरी, 2012 किया गया है। राजभवन के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है।उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली में दो संशोधन किए गए हैं। नियमावली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलग-अलग आयोग अस्तित्व में आने की वजह से एक संयुक्त आयोग के स्थान पर दोनों आयोग के अध्यक्षों को प्राधिकरण का पदेन सदस्य बनाया गया है। वहीं प्राधिकरण में अधिवक्ता पैनल में फीस के भुगतान के प्रावधान को निरस्त किया गया है। राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण की ओर से फीस देने का प्रावधान पहले से ही मौजूद होने के चलते संशोधन किया गया है। अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र के समापन को मंजूरी दे दी। कैबिनेट की बैठक में अब ऐन पहले एजेंडा नहीं रखा जाएगा। बैठक से हफ्ताभर पहले मंत्रियों को एजेंडा भेजना अनिवार्य किया गया है। मंत्रिमंडल ने यह भी तय किया कि अब हर महीने के दूसरे और चौथे बुधवार को शाम चार बजे मंत्रिमंडल की बैठक होगी। गवर्नेंस के लिहाज से सरकार के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे मंत्रिमंडल में रखे जाने वाले तमाम प्रस्तावों में वित्त, न्याय व कार्मिक समेत तमाम प्रशासकीय विभागों का परामर्श लिया जा सकेगा। नई सरकार ने अहम फैसला लेते हुए पिछली सरकार के आनन-फानन में बगैर प्रशासकीय विभागों के परामर्श के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल के फैसले लेने की परंपरा पर अंकुश लगा दिया है।

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