डिग्री किसी और की नौकरी कर रहा कोई और .......

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 4/9/2017 10:28:24 PM
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शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्तियों के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब इस तरह के प्रकरण भी आ रहे हैं, जिसमें टीचर किसी अन्य की डिग्री के आधार पर कार्यरत हैं। इस तरह के अधिकतर मामले हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून और नैनीताल जिले में बताए गए हैं। उत्तराखंड शिक्षकों की नियुक्तियों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। शिक्षा विभाग में कई ऐसे टीचर हैं, जो किसी अन्य के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर काम कर रहे हैं। शासन के संज्ञान में भी इस तरह के कई मामले आए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रकरण की जांच कराई जा रही है। सिकंदरपुर जिला बिजनौर निवासी एक व्यक्ति हाईस्कूल से लेकर इंटरमीडिएट और बीटीसी के फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र बनाकर सैकड़ों लोगों को विभाग में नियुक्तियां दिलाए हुए हैं। वह खुद भी हाईस्कूल नहीं हैं, लेकिन एक स्कूल में हेडमास्टर के पद पर कार्यरत हैं। वह पिछले कई दिनों से स्कूल से अनुपस्थित हैं। अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह के मुताबिक विभाग को इस तरह की शिकायतें मिली हैं, कि कुछ लोग किसी अन्य व्यक्ति की डिग्री लेकर विभाग में कार्यरत हैं। इस तरह के फर्जीवाडे़ को देखते हुए मामले की विजिलेंस जांच कराई जा रही है। प्रदेश में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्तियों के सबसे अधिक मामले अशासकीय और प्राथमिक विद्यालयों के हैं। विभागीय अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत के चलते रिश्तेदारों और परिचितों को नियुक्तियां दी गई हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोगों की ओर से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगे जाने के बावजूद विभाग की ओर से सूचनाएं नहीं दी जा रही हैं। रुड़की (हरिद्वार) निवासी राकेश अग्रवाल के मुताबिक मंगलौर के एक अशासकीय स्कूल में तीन प्रवक्ताओं और एक लिपिक की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा हुआ। आरटीआई के तहत मामले की सूचना मांगी, लेकिन जानकारी नहीं मिली। सूचना आयोग में अपील करने पर आयोग ने 15 जून 2016 को स्कूल पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया, लेकिन उन्हें आज तक सूचना नहीं मिली। जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज में हुई नियुक्तियां भी सवालों में हैं। करनपुर निवासी सावित्री वर्मा के मुताबिक इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी में संविदा पर कार्यरत शिक्षिका को 22 जून 2010 को स्थायी नियुक्ति दी गई। इसकी नियुक्ति अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई है। चयन सूची में इस शिक्षिका को अयोग्य बताया गया, लेकिन बाद में इसे पात्र दर्शाया गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन मामले में कार्रवाई के बजाए प्रकरण को दबाव हुए है। सीटीईटी के लिए वर्ष 2011 के बाद स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि जिसके पास दो वर्षीय डीएलएड या दो वर्षीय कोई डिप्लोमा है। वही अभ्यर्थी सीटीईटी के लिए पात्र है, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने इंटरनेट पर आनलाइन फार्म भरते हुए बताया कि उनके पास दो वर्षीय डिप्लोमा है। जानबूझकर इन अभ्यर्थियों ने झूठ का सहारा लिया और गलत विकल्प भरकर सीटीईटी की परीक्षा दी। बताया गया है कि यह अभ्यर्थी आज विभिन्न सरकारी स्कूलों में टीचर के पद पर कार्यरत हैं।

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