पब्लिक स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएंगी: अरविंद पांडेय

विपुल अग्रवाल, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 4/11/2017 10:28:25 PM
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नई सरकार का रुख पब्लिक स्कूलों की बेचैनी बढ़ाने जा रहा है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि अगले शैक्षिक सत्र से प्रदेश के सभी पब्लिक स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएंगी। साथ ही फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। फीस का निर्धारण सरकार करेगी। इसके लिए कानून बनाने पर सरकार मंथन कर रही है। पांच साल तक पाठ्यक्रम में कोई तब्दीली न हो, इस दिशा में भी विचार किया जा रहा है। विधानसभा स्थित कक्ष में बातचीत में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि अगले शैक्षिक सत्र से निजी स्कूलों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। राज्य सरकार खुद एनसीइआरटी की किताबें तैयार कराएगी, ताकि स्कूलों को समस्या से जूझना न पड़े। इस संबंध में सीबीएसइ के अधिकारियों से भी वार्ता की जा रही है। स्कूली पाठ्यक्रम में हर साल बदलाव को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि पांच साल तक पाठ्यक्रम में तब्दीली न हो, इसे किताबों को हर वर्ष बदलने की नौबत नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी के बारे में कई शिकायतें उन्हें मिली हैं। इस पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने निजी स्कूलों के लिए सालाना फीस की सीमा का फार्मूला भी बताया। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से पांचवीं तक सालाना 15 हजार रुपये, छठवीं कक्षा से नवीं तक 25 हजार और इसके बाद बारहवीं तक 30 हजार रुपये से ज्यादा फीस नहीं होनी चाहिए। इस बारे में कानून बनाने के बारे में मुख्यमंत्री के साथ वार्ता की जाएगी। सरकार इस मामले में बैकफुट पर नहीं आएगी। उन्होंने निजी स्कूल संचालकों से शिक्षा व्यवसाय का सम्मान करते हुए सहयोग मांगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राजकीय विद्यालयों की दशा में सुधार किया जाएगा। उन्होंने विधायकों और मंत्रियों से अपनी विधायक निधि का 15 फीसद अपने-अपने क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों को देने की अपील भी की। शिक्षा मंत्री ने कहा कि चार जिलों ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल में मिड डे मील अक्षय पात्र योजना संचालित होगी। उक्त चारों जिलों में मिड डे मील के किचन के लिए भूमि चिह्नि‍त करने के निर्देश दिए गए हैं। एक किचन से 50 किमी के दायरे के सभी विद्यालयों को मिड डे मील मुहैया कराया जाएगा। पर्वतीय जिलों में इसे लागू करने को सर्वे कराया जाएगा।

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