जानें बाहुबली में क्या रोल था vfx का

पोलखोल न्यूज़ 5/20/2017 1:14:05 AM
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भारतीय सिनेमा के कई रिकॉर्ड बनाने वाली फैंटेसी ड्रामा फ़िल्म बाहुबली-2, अपने स्पेशल इफ़ेक्ट को लेकर काफी चर्चा में है. बड़े-बड़े झरने, पानी में डूबी शिवगामी देवी के हाथों मे बच्चा या फ़िर प्रभास और तमन्ना का खूबसूरत वादियों के बीच रोमांस. बाहुबली-1 ने इन सब शॉटस से लोगों का दिल जीता तो वहीं बाहुबली-2 अब अपने और भी ख़ूबसूरत और भव्य VFX को लेकर चर्चा में है. और इन स्पेशल इफ़ेक्ट्स के लिए 35 से ज्यादा देशी और विदेशी स्टूडियो की मदद ली गई.

बाहुबली-2 में VFX सुपरवाइज़र रहे आर सी कमलकन्ना के मुताबिक, इस फ़िल्म के लिये कई भारतीयों के साथ विदेशी स्टूडियों को काम दिया गया. हमारे पास बहुत कम समय था. जो स्टूडियो जिस काम में दक्ष थे उन्हें वही काम दिया गया. तब जाकर इतना बड़ा प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ. हर बड़ी फ़िल्म के लिये ऐसे ही काम होता है. बाहुबली-2 मे माहिष्मती राज्य के बड़े झरने पर बने एलिफ़ेंट ब्रिज की चर्चा हर कोई कर रहा है. इसे कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की मदद से बनाया गया. साथ ही प्रभास और फ़िल्म की हीरोइन अनुष्का शेट्टी पर फ़िल्माया गया रोमांटिक गीत एक सफेद रंग की हंस की नाव में फ़िल्माया गया जिसके लिए हंस के आकार का लकड़ी का सेट बनाया गया. कटप्पा ने जिस सीन में बाहुबली को मारा, उस सीन को फ़िल्माने के लिए भी वीएफ़एक्स का सहारा लिया गया. बाहुबली दो में VFX सुपरवाइज़र रहे आरसी कमलकन्ना के मुताबिक, कटप्पा के बाहुबली को मारने वाले सीन में हमने कम्प्यूटर की मदद से तलवार कैसे आर पार होगी और दोनों किरदार कैसे खड़े होंगे, इस पर कई बार चर्चा की फिर ये सीन तैयार हुआ. फ़िल्म में मंत्रियों के दरबार को भले ही कुछ सेकेंड के लिये दिखाया हो लेकिन इसे ग्राफ़िक्स के तौर पर तैयार करने मे दो महीने का समय लगा. खास बात ये है कि इस सीन को बाहुबली-1 की शूटिंग के दौरान ही शूट किया गया था. क्रोमा पर शूट हुए इस सीक्वेंस में राजसिंहासन के पास 4 खंभे और कुछ ही सैनिक थे. लेकिन पर्दे पर आधा किलोमीटर लंबा राजदरबार और सैकड़ों सैनिक दिखते हैं. बाहुबली-1 में पानी में डूब रही शिवगामी देवी के हाथों मे बच्चे वाला सीन ख़ासा चर्चित हुआ. सीन फ़िल्माते वक़्त पानी में बच्ची की जगह पानी की बोतल का इस्तेमाल किया गया था. वीएफ़एक्स की मदद से इस सीन को तैयार करने में भी कई दिन लगे. बाहुबली-2 में हवा में उड़ने वाले सैनिकों वाले सीन बड़े मशहूर हुए. इन सीन को भी ग्रीन मैट यानि क्रोमा पर शूट किया गया. इस सीन के लिए एक छोटी सी दीवार बनाई गई. हवा में दिखाए गए इस सीन को भी कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की मदद से फ़िल्माया गया और इसके लिए 5 महीने का वक़्त लगा. प्रसिद्ध ऐरो सीन और देवसेना की लड़ाई को भी कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की मदद से दिखाया गया. फ़िल्म की टीम के मुताबिक़ VFX पर फ़िल्म के कुल बजट का 20 प्रतिशत हिस्सा यानि लगभग 80 से 90 करोड़ रुपया खर्च किया गया. फ़िल्म के लिये ग्राफिक्स करने वाले मकुटा से जुड़े पैट कैलिफोर्निया से भारत में आकर कंपनी चला रहे हैं. वो मानते हैं कि, राजामौली जैसे निर्देशकों की सोच और नज़र बहुत पैनी है. जिस तरह से वो काम करते और करवाते हैं वो काबिले-तारीफ है. पैट के मुताबिक़ बॉलीवुड भी तकनीक के मामले में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और हॉलीवुड से ज़्यादा पीछे नहीं है.

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