सीएम त्रिवेंद्र को ढैंचा बीज मामले में क्लीनचिट

कमल नेगी, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 6/15/2017 10:56:11 PM
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ढैंचा बीच खरीद घोटाले पर सदन में पेश त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन कृषि मंत्री और सचिव को क्लीन चिट दी गई है। सरकार का आरोप है कि पूर्व सरकार ने जांच रिपोर्ट एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) चार बार कैबिनेट में आने के बावजूद इसे सदन में नहीं रखा। रिपोर्ट में कहीं भी तत्कालीन कृषि मंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आरोपी नहीं बनाया गया है। तत्कालीन सचिव कृषि भी इस मामले से बाहर आते नजर आ रहे हैं। दरअसल, वर्ष 2005-06 में कृषि विभाग ने प्रदेश में खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा बीज वितरण करने की योजना बनाई। इसके क्रम में तत्कालीन कृषि निदेशक ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए विभाग को निर्देश जारी किए। इस दौरान ऊधमसिंह नगर, देहरादून व चंपावत में तकरीबन 15,000 कुंतल ढैंचा बीज की आवश्यकता बताते हुए टेंडर जारी कराए गए। आरोप यह लगे की यह टेंडर 60 फीसद से अधिक दर पर दिए गए। इसके बाद वर्ष 2010 में एक निजी कंपनी को बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए बीज आपूर्ति का भी ठेका दे दिया गया। मामले उछलने पर कांग्रेस सरकार ने इसकी जांच त्रिपाठी आयोग को सौंपी थी। 2014 में आयोग की ओर से रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई। तब से अब तक इस मामले में सरकार ने एटीआर को सदन के पटल पर नहीं रखा था। एटीआर को सदन में रखने के बाद भाजपा इस मामले में कांग्र्रेस पर हावी नजर आ रही है। हालांकि, अभी विपक्ष का रुख इस मामले में सामने आना बाकी है। उधर, सरकार ने बहुप्रतीक्षित लोकायुक्त विधेयक और उत्तराखंड लोकसेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण विधेयकों को प्रवर समिति की सिफारिशों के साथ सदन के पटल पर रख दिया। इन्हें अब आगामी विधानसभा सत्र में ही पारित कराया जाएगा। दरअसल, ये भाजपा के सत्ता में आते ही सौ दिन में लोकायुक्त और तबादला कानून बनाने का दबाव ही रहा कि जिसके चलते सरकार ने गुरुवार को आनन-फानन उक्त दोनों विधेयक प्रवर समितियों की सिफारिशों के साथ सदन के पटल पर रख दिए। 

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