8 लाख बेरोजगारों का पैसा भी खा गये घोटालेंबाज !

पोलखोल न्यूज, एक्सक्लूसिव। 7/20/2017 12:54:40 AM
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प्रचंड बहुमत के साथ राज्य की कमान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथ में है लेकिन प्रदेश में 8 लाख बेरोजगारों को नौकरी मिलना तो दूर उनको मिलने वाला बेरोजगारी भत्ता भी घोटालेबाजों की पेट में समा गया है। 2012 से शुरू हुआ बेरोजगारी भत्ता की योजना जहां बजट के अभाव में दम तोड़ती दिख रही है वहीं 2 वर्ष के तय भत्ता पात्र बेरोजगारो को सिर्फ 13 महीने का ही भत्ता मिला है बाकी 9 माह की धनराशि कहां गयी इसका जिम्मेदार अधिकारियो के पास कोई जबाव नहीं है। ऐसे हालात में बेरोजगारी कौशल भत्ते में कुछ गड़बड़ी की बू आ रही है। राज्य में बेरोजगारों की संख्या 8 लाख के करीब पहुंच चुकी है लेकिन बेरोजगारी पर कोई स्थाई समाधान सरकारों के पास नहीं है। 16 साल बाद भी रोजगार की गांरटी मिल पाए ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। पूर्व सरकार ने जिस बेरोजगारी भत्ता देकर युवाओ को बांधने की कोशिश की थी अब बजट के अभाव में उसकी भी हवा निकलने लगी है। प्रदेश में सेवायोजन कार्यालयो की स्थापना तो हुई लेकिन यह कार्यालय सिर्फ पंजीकरण के कार्य तक ही सिमट के रह गये हैं। प्रदेश के सभी जिलों की स्थिति एक जैसी ही है। संख्या में देखे तो चंपावत में 20 हजार, अल्मोड़ा में 66 हजार, नैनीताल में 75 हजार, बागेश्वर में 26 हजार, उधमसिंहनगर में 76 हजार, रूद्रप्रयाग में 29 हजार, चमोली में 36 हजार, पौड़ी में 65 हजार, हरिद्वार में 71 हजार, उत्तरकाशी में 37हजार , टिहरी में 57 हजार और देहरादून में डेढ लाख से ऊपर बेरोजगार पंजीकृत हो चुके हैं। वहीं कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गयी रोजगार और कोशल विकास भत्ता योजना पर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गये है। एमटेक कर चुके राजेन्द्र नेगी बताते है सरकार द्वारा हमें दिया जाने वाला बेरोजगारी भत्ता एक मजाक के सिवा कुछ नहीं है, पढ़ लिख कर सेवायोजन कार्यालय के चक्कर काटकर हम थक चुके हैं एक अदद नौकरी आज तक नहीं मिली है। वहीं समाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी थपलियाल कहती है प्रदेश में पढ़ लिख कर अगर यहां के युवा को नौकरी नहीं मिलेगी तो प्रदेश से पलायन को कैसे रोका जा सकता है। 

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