अब कैसे होगी विधायकों की हसरत पूरी!

पोलखोल न्यूज, ब्यूरो। 7/26/2017 11:44:20 PM
img

प्रदेश में मंत्री बनने से चूक गये विधायकों को सरकार पावर में लाने के लिए उन्हें ससंदीय सचिव बनाकर मंत्रियों वाली सुविधाओ से नवाज देती है लेकिन अब प्रदेश सरकार चाह कर भी अपने चहेते विधायकों को यह पावर नहीं दे पायेगी साथ ही संसदीय सचिव बनने का सपना पाल रहे विधायको का सपना भी चकनाचूर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया है उसके तहत अब सूबे के सीएम त्रिवेंद्र रावत चाह कर भी अपने किसी समर्थक विधायक को संसदीय सचिव नहीं बना पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि राज्य विधानसभाओं को संसदीय सचिव नियुक्त करने का अधिकार हासिल नहीं है। गौरतलब है कि राज्यों में संसदीय सचिव उन लोगों बनाया जाता है जो सूबे की राजनीति में कद्दावर होते हैं लेकिन किसी वजह से  मंत्री पद से वंचित रह  जाते हैं। जस्टिस जे. चेलामेश्वर की तीन सदस्यों वाली पीठ ने बुधवार को दिए फैसले में यह व्यवस्था दी। साथ ही संसदीय सचिवों के पद सृजित करने वाले असम संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते तथा अन्य प्रावधान) कानून, 2004 को रद्द कर दिया। दरअसल पीठ के समक्ष सवाल था कि क्या राज्य विधानसभाओं को अनुच्छेद 194 (3) और एंट्री 39 के तहत संसदीय सचिव कानून बनाने की योग्यता हासिल है। पीठ ने फैसले में कहा, संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की एंट्री 39 में विधानसभा सदन में शक्तियों, विशेषाधिकार तथा सदस्यों तथा समितियों को छूटें आदि शामिल हैं। अनुच्छेद 194(3) में भी लगभग समान रूप से राज्य विधानसभाओं को अधिकृत किया गया है कि वे सदस्यों के विशेषाधिकार, उन्हें मिली छूटों तथा संसदीय समितियों की शक्तियों पर प्रावधान करें। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 194 राज्य विधानसभाओं को संसदीय सचिव के कार्यालय सृजित करने की शक्ति नहीं देता। कोर्ट ने अनुच्छेद 187 का हवाला दिया और कहा कि इस अनुच्छेद में विधानसभा के सचिवालय स्टाफ के बारे में प्रावधान के विषय में बताया गया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तराखंड में भी संसदीय सचिवों की नियुक्तियों की संभावना खत्म हो गई है। इससे संसदीय पद के दावेदारों को झटका लगा है।

Advertisement

img
img