पूर्व सीएम हरीश रावत ने कविता के ज़रिए मोदी सरकार पर कैसा तंज

पोलखोल न्यूज़, देहरादून 8/7/2017 11:15:06 PM
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस बार मोदी सरकार पर कविता के ज़रिए तंज कैसा है| हरीश रावत ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में जो लिखा है वह आपके लिए शब्दशः पेश है- मैं न कवि हूं, न कवि हृदय. विशुद्ध राजनीतिक हूं| मगर नौजवानों ने जिन्होंने पिछले चार वर्षों से नमो नमो के स्वर को गुंजायमान कर अपना गला फाड़ दिया है, उन नौजवानों की जिस तरीके से उपेक्षा हो रही है| नौजवानों के लिए कुछ नौकरियों के अवसर घट रहे है, मैं चिंतित हूं, व्यथित हूं| मैंने उसको एक तुकबंदी में ढाला है| मैं अपने दोस्तों को जिन तक मेरी ये तुकबंदी पहुंचेगी, उनसे आग्रह है कि जो उनमें से इसको और बेहतर बना देगा, जो इसको परिमार्जित करके एक लयमय कविता बना देगा उनको ऐसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को 5 हजार रुपया और जो इस जो मेरी तुकबंदी के विरोध में दूसरी तुकबंदी बनाकर मेरी तुकबंदी में उठाये गए सवालों का जवाब देगा, उनमें से जिसकी भी प्रतिलोभी तुकबंदी बेहतर होगी उनको भी 5 हजार रुपया इनाम के तौर पर दिया जाएगा| और इसके लिए मैं तीन मूर्धन्य व्यक्तियों से आग्रह कर रहा हूं कि वो जज के पैनल के रूप में हमारे अनुरोध को स्वीकार करें|

खोलों लाल अब आंखे खोलों, दिल के साथ कुछ दिमाग को भी टटोलो|

3.5 साल यूं ही बीत गए, तीज त्यौहार सब आये और चले गए पर अच्छे दिन और दूर भए|

मन की बात कहते कहते भय्या भूल गए, जनधन के खाते सूखे रह गए|

ना आमदनी दुगनी हुई ना महंगाई कम हुई, कर्ज माफ़ नहीं हुआ यूं ही मर गए, फिर भी वो मन की बात कहते चले गए|

डबल इंजन दिया, 20 हजार पद खाली, फिर भी नौकरी को तरसते रह गए, अब तो भैय्या नौकरी का दरवाज़ा खोलो|

कभी तो युवा के मन की बात बोलों, उठो भैय्या दिल का दरवाज़ा खोलो|

वक्त बीत रहा, मन की आंखें खोलो, अब तो नौकरी का दरवाज़ा खोलो| 

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