विराट कोहली का न्यू इंडिया मंत्र

पोलखोल न्यूज़, नई दिल्ली 9/12/2017 4:05:07 AM
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क्रिकेट के तीनों फोरमेट में श्रीलंका पर 9-0 की ऐतिहासिक जीत के बाद टीम इंडिया का पूरा ध्यान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली वन डे सीरीज पर है| भारत अपने घरेलू मैदानों पर एक मजबूत टीम है, फिर भी यह उम्मीद की जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया उसे कड़ी टक्कर देगा| एक सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि क्या श्रीलंका के साथ जिस तरह से भारत ने लगातार प्रयोग किए क्या इस तरह के प्रयोग ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जारी रहेंगे| श्रीलंका के खिलाफ 9-0 से क्लीन स्वीप कर ऐतिहासिक दर्ज करने वाले कप्तान विराट कोहली टीम को लेकर पहले ही अपने इरादे जाहिर कर चुके हैं| कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ एकमात्र टी-20 में सात विकेट से जीत दर्ज करने के बाद कहा था,  यह बेहद खास है| ऐसा (सभी प्रारूपों में क्लीन स्वीप) पहले कभी नहीं हुआ था| इसका पूरा श्रेय खिलाड़ियों को जाता है| हमारी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत है और इन खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया| हमने कुछ प्रयोग किए और परिणाम शानदार रहे| इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत के शुरू के तीन बल्लेबाज बेहतरीन हैं, लेकिन चौथे नंबर से समस्या शुरू हो जाती है| 9-0से जीत के बावजूद भारत के मध्यक्रम में स्थायित्व नहीं है| श्रीलंका में लगातार यह कमजोरी उजागर हुई| वनडे सीरीज में कई बार भारत का मध्यक्रम नाटकीय ढंग से ढह गया और पूरी टीम दबाव में आ गई, इसलिए टीम के संयोजन को लेकर कई सवाल उठे| क्या केएल राहुल भविष्य में वन डे उपयुक्त होंगे? क्या केदार जाधव को ज्यादा कंसीस्टेंट होने की जरूरत है? क्या आंजिक्य रहाणे को अधिक मौके मिलने चाहिए या युवराज सिंह-सुरेश रैना की वन डी टीम में वापसी होनी चाहिए? लगातार प्रयोग ही इन संदेहों को खत्म कर सकता है| भारत के पास इस समय बेहतरीन बेंच स्ट्रैंथ है| इनमें अंजिक्य रहाणे हैं, जिन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ हाल ही में सबसे अधिक रन बनाए हैं| मनीष पांडे, केदार जाधव और केएल राहुल में से केवल दो ही प्लेइंग इलेवन में चुने जा सकते हैं| टीम की जरूरत के हिसाब से लगातार खिलाड़ी बदले जा सकते हैं| भारत के तीनों युवा स्पिनरों ने लंका में बेहतरीन प्रदर्शन किया है| आश्विन और रवींद्र जडेजा की अनुपस्थिति में इस बार भी कुलदीप यादव, यजुवेंद्र चहल और अक्षर पटेल के रूप में इन तीनों के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं| हर खिलाड़ी को समान अवसर दिए जा सकते हैं और नए टीम गठन को आजमाया जा सकता है| केएल राहुल और अंजिक्य रहाणे ओपनर के रूप में या मध्यक्रम में आजमाया जाना चाहिए| रोटेशनल नीति के तहत रोहित शर्मा और शिखर ध्वन को रेस्ट दिया जा सकता है| गेंदबाजी में अक्षर, कुलदीप और यजुवेंद्र चहर को क्रमशः अवसर दिया जा सकता है| रोटेशन प्रणाली के तहत विराट कोहली और शिखर धवन को अधिक से अधिक आराम दिया जा सकता है| प्रयोग का अर्थ है लगातार बैंच स्ट्रेंथ को आजमाना| इससे हर मैच में एक दो खिलाड़ियों को आराम दिया जा सकता है| दूसरे खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है| कोहली और धवन तीनों फोरमेट में लगातार खेल रहे हैं, इनकी जगह दूसरे खिलाड़ियों को आजमाया जा सकता है| जिस तरह आज बेपनाह क्रिकेट खेला जा रहा है, उसमें रोटेशन और खिलाड़ियों को आराम दिया जाना एक अहम बात हो सकती है ताकि खिलाड़ी फ्रेश बने रहें| जल्द ही भारत को दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना है. ऐेसे में किसी खिलाड़ी की चोट भारत के लिए समस्याएं खड़ी कर सकती है| 

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