किताबों के बाहर क्यों दम तोड़ रही है हिंदी

पोलखोल न्यूज, हल्द्वानी। 9/14/2017 2:29:00 AM
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हिंदी को भारत में भले ही प्रथम राजभाषा का संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। देश में 77 फीसदी लोग हिंदी बोलते और समझते हैं। लेकिन फिर भी हिंदी को हिंग्लिश करने और सही हिंदी लिखने में आम तौर पर गलतियां पायी जा रही हैं। हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण ने किताबों  के बाहर दम तोड़ती हिंदी शीर्षक से आज एक अच्छा समाचार प्रकाशित किया जिसमें  सरकारी विभागों और कार्यालयों में लगे होर्डिंग में हिंदी में तमाम गलतियां दिखायी देती है। चाहे हल्द्वानी में स्थित महिला अस्पताल में लगे होर्डिंग हो या फिर कालाढूंगी चैराहा पर लगे पुलिस के होर्डिंग हो उनमें भी हिंदी की तमाम गलतियां दिखायी देती हैं। इस अलाावा बेस अस्पताल, सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में लगे होर्डिंग बोर्ड का भी कुछ ऐसा ही हाल है। जिसे हिंदी दिवस प्रमुखता प्रकाशित कर दिखाया गया कि हमारे आस पास हिंदी का कैसा बुरा हाल है। हालांकि इस विषय के सार्वजनिक करने के बाद शायद इन होर्डिंग की हिंदी ठीक कर ली जाये। लेकिन इस विषय गंभीर है कि हिंदी राजभाषा होने के बाद भी हमारी हिंदी में दक्षता क्यों नहीं है। 

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