आरुषि हत्याकांड में तलवार दंपति को हाईकोर्ट ने किया बरी

पोलखोल न्यूज़, इलाहाबाद 10/12/2017 4:15:17 AM
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नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट आज फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में आरुषि के माता-पिता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके नारायण तथा न्यायमूर्ति एके मिश्र की खंडपीठ ने दिया है। बेंच ने कहा कि दंपति को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए, उन्होंने अपनी बेटी को नहीं मारा। 2013 में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने हालात से जुड़े सबूतों के आधार पर दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ जनवरी 2014 में दोनों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। फैसले के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार दंपती को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी बेटी को नहीं मारा। निचली अदालत का फैसला हालात से उपजे सबूतों के आधार पर था। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजेश और नूपुर तलवार गाजियाबाद की डासना जेल से रिहा हो जाएंगे। इससे पहले 25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने हालात से जुड़े सबूतों के आधार पर दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ जनवरी 2014 में दोनों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। मालूम हो कि डा. तलवार की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी। विवेचना के दौरान घर की छत पर उनके घरेलू नौकर हेमराज का शव भी पाया गया था। सीबीआई ने सीधा सबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन सीबीआई कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए तलवार दंपती के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 

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