NSG में भारत के प्रवेश के लिए कोशिशें जारी : केनेथ जस्‍टर

पोलखोल न्यूज़ 1/12/2018 12:55:37 AM
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अमेरिका ने कहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के लिए उसकी कोशिशें जारी हैं। भारत में अमेरिका के नवनियुक्‍त राजदूत केनेथ जस्टर ने गुरुवार को कहा कि हम अपने सहयोगियों के साथ भारत को एनएसजी में प्रवेश दिलाने के मुद्दे पर काम कर रहे हैं। जेस्टर ने अपना पद संभालने के बाद दिए गए पहले सार्वजनिक भाषण में कई अहम मुद्दों पर बात की, जिसमें एनएसजी में भारत की सदस्‍यता का मुद्दा भी शामिल था।

चीन डाल रहा है अड़ंगा 
उल्लेखनीय है कि 48 देशों वाले इस समूह में भारत के प्रवेश के मुद्दे पर इसके ज्यादातर सदस्य राजी हैं, मगर चीन लगातार भारत की कोशिशों में अड़ंगा डाल रहा है। वहीं भारत इसकी सदस्यता हासिल करने के लिए जी-तोड़ प्रयास कर रहा है। उसने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देशों का समर्थन भी हासिल कर रखा है। फिर भी उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर चीन खड़ा हो गया है।

भारत के सामने रखी हैं ये शर्तें 

चीन नहीं चाहता कि भारत को एनएसजी में प्रवेश मिले। इसके लिए उसने दो शर्तें थोप रखी हैं। सबसे अहम यह है कि जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं, उन्हें सदस्यता से महरूम रखा जाए। इसके साथ ही चीन पाकिस्तान को इस मामले में भारत के बराबर आंकता चला आ रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर चीन से भारत की बातचीत हो चुकी है। मगर उसका हमेशा से यही राग रहा है कि वह भारत का विरोध नहीं कर रहा है, मगर उसे शर्तें तो माननी होंगी।

रूस भी है अब भारत के साथ

रूस ने इस मुद्दे पर एक बार फिर भारत के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का सबसे बड़ा सबूत दिया है। एनएसजी की सदस्यता के मुद्दे पर चीन और पाकिस्तान को झटका देते हुए रूस ने भारत का समर्थन किया है। रूस ने स्‍पष्‍ट रूप से कहा कि एनएसजी की  सदस्यता के लिए भारत की पाकिस्तान के साथ तुलना नहीं की जा सकती है। रूस के अनुसार, परमाणु परीक्षण के मामले में भारत का परमाणु अप्रसार का शानदार रिकॉर्ड है, जबकि पाकिस्तान के बारे में ऐसा नहीं का जा सकता है। पाकिस्तान परमाणु अप्रसार की योग्यता के पैमाने में खरा नहीं उतरता है।

तकनीक को लेकर चुनौतियां 

जस्टर ने यह भी माना कि भारत को संवेदनशील अमेरिकी तकनीक देने के मामले में दोनों देशों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इन तकनीकों तक पहुंच बढ़ाना चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल सिर्फ भारत द्वारा किया जाएगा। इसके लिए निर्यात नियंत्रण की एक अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करनी होगी, जो इस समय भारत के पास नहीं है।

एच1बी वीजा पर भी दिया आश्‍वासन

अमेरिका में एच1बी वीजा को लेकर भी जस्टर ने यह आश्वासन दिया है कि वैध तौर पर रह रहे भारतीय कामगारों को जबरदस्ती वहां से भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अप्रवासियों का देश है, मगर हमेशा के लिए इनकी संख्या बढ़ाई नहीं जा सकती है। जो लोग बाहर से आते हैं, उन्हें एक कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। हाल ही में समाचार पत्रों में एच1बी वीजा धारकों को स्वदेश भेजे जाने को लेकर छपी खबरों का उन्होंने खंडन किया और कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। अमेरिका संभवत: दुनिया का सबसे खुला देश है जहां हर क्षेत्र से लोग आते हैं। भारतीय मूल के ही 40 लाख लोग वहां रह रहे हैं।

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