दूसरे बजट का आकार चार लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा : योगी सरकार

पोलखोल न्यूज़, लखनऊ 1/15/2018 4:33:59 AM
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योगी सरकार अपना दूसरा बजट पेश करने की तैयारी में जुट गई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के इस बजट को फरवरी के दूसरे या तीसरे हफ्ते में विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किये जाने की संभावना है। सरकार के आगामी बजट का आकार चार लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। बुनियादी ढांचे पर जोर के साथ युवाओं, किसानों, महिलाओं और वंचितों को बजट में तरजीह दिये जाने के आसार हैं। सरकार ने अपना पहला बजट बेहद कशमकश की स्थिति में पेश किया था। तब उसके सामने अपने चुनावी वादे के अनुरूप लघु व सीमांत किसानों के कर्ज माफ करने की चुनौती थी। कर्ज माफी के भारी-भरकम खर्च की चुनौती से निपटने में अपने तमाम दूसरे चुनावी वादों के लिए बजट आवंटित करने में सरकार ने अपने हाथ बंधे हुए महसूस किये थे। पिछले बजट में कर्ज माफी के लिए 36 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने का सबसे बड़ा खामियाजा बुनियादी ढांचा क्षेत्र ने भुगता था। चाहते हुए भी बुनियादी ढांचे पर खर्च करने में सरकार को अपनी मुट्ठी भींचनी पड़ी थी। इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। सरकार के सामने कर्ज माफी की चुनौती न होने से उसके हाथ कमोबेश खुले होंगे। योगी सरकार के पिछले बजट का आकार 3.84 लाख करोड़ रुपये था। रियल एस्टेट में मंदी के कारण स्टांप शुल्क वसूली में आयी कमी और जीएसटी को लेकर स्थिति सहज न होने के बावजूद यह तय है कि दूसरे बजट का आकार चार लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। यह बजट योगी सरकार की बहुप्रचारित इन्वेस्टर्स समिट के शोर के बीच पेश होगा। इन्वेस्टर्स समिट 21 व 22 फरवरी को राजधानी में आयोजित होगी, जिसमें निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार की साख दांव पर होगी। लिहाजा निवेश जुटाने के मद्देनजर नए बजट में सरकार बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस करेगी। वहीं सरकार की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी होंगी। यह सर्वविदित है कि केंद्र में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनवाने में उप्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भाजपा उप्र में अपना प्रदर्शन दोहरा सके, इसके लिए बजट के जरिये मतदाताओं को साधने की भरपूर कोशिश भी होगी। हालांकि लोकसभा चुनाव के शोरगुल के बीच राज्य सरकार को अपना एक और बजट पेश करने का मौका मिलेगा लेकिन दूसरे बजट के जरिये सरकार अपने चुनावी घोषणापत्र में किये गए उन तमाम वादों को निभाने की शुरुआत कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेगी जिन्हें वह अपने पहले बजट में स्थान नहीं दे सकी थी। बजट भाजपा के सबका साथ, सबका विकास नारे के फ्रेमवर्क में गढ़ा जाएगा, जिसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं और वंचितों को तवज्जो मिलने के आसार हैं।  

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