यूपी : गोरखपुर तथा फूलपुर लोकसभा में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर

पोलखोल न्यूज़, लखनऊ 3/16/2018 12:59:34 AM
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उत्तर प्रदेश में गोरखपुर तथा फूलपुर लोकसभा में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हैं। कल लखनऊ में एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उपचुनाव अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। चुनाव के जरिए हम अपना आकलन करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि हम पड़ाव पर ही सचेत हो गए हैं यानी खाई में गिरने से पहले ही संभल गए हैं। कर्मस्थली गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह दोनों नतीजे हम सभी के लिए एक बड़ा सबक हैं। हम तो प्रदेश में खाई में गिरने से पहले ही संभल गए। हमको तो अपनी गलतियां सुधारने का मौका मिला है। अब हम 2019 में प्रदेश की 80 में से 80 सीटें जीतेंगे। किसी भी चुनाव के जरिए हम अपना आकलन करते हैं। देश के साथ प्रदेश की जनता 2019 में भी सकारात्मक सोच के साथ हित संरक्षण देने वाली सरकार चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में जीत से न हम खुश होते हैं न हार से दुखी। जीत साथ में जवाबदेही लेकर आती है और हार सबक। हार के इस सबक ने हमें खाई में गिरने के पहले संभलने का मौका दे दिया। उन्होंने कहा कि 2019 में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में भाजपा की सरकार बनेगी। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी लोकसभा की सभी 80 सीटें जीतेगी। सूबे में उपचुनावों में मिली हार को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा गोरखपुर और फूलपुर में अति आत्मविश्वास से हार हुई। कहीं पर भी अति आत्मविश्वास घातक होता है। मैं तो जितनी भी बार गोरखपुर चुनाव प्रचार में गया, कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनाव जीत रहे हैं। इस तरह अति आत्मविश्वास में कार्यकर्ता उदासीन हो गए। उन्होंने काम नहीं किया तो मतदाता भी उदासीन हो गए। वहां पर कार्यकर्ताओं को लगा कि यह तो योगीजी की सीट है। योगी जी हैं तो यहां पर सब ठीक है। उनकी सीट तो हम जीत ही लेंगे। कार्यकर्ताओं को समझना होगा कि कितना भी भरोसा क्यों न हो, चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहिए। हार की मुख्य वजह कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास रही। गोरखपुर के हर दौरे में मुझसे कहा गया कि जीत में कोई संदेह नहीं। मैंने टोका भी, कहा कि चुनाव और परीक्षा में यह रवैया ठीक नहीं। कार्यकर्ता निष्क्रिय हुए तो वोटर उदासीन। वोट डालने ही नहीं निकले। गोरखपुर में प्रत्याशी की बीमारी भी एक वजह रही। गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में पहली बार पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट अफसरों पर नाराजगी जतायी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा समझने के लिए साल भर का समय काफी होता है। जो नहीं समझे हैं, उनसे सरकार उसी निर्ममता से पेश आएगी जैसा कि वह अपराधियों के साथ आ रही है। ऐसे लोगों की न केवल नौकरी जाएगी बल्कि उनकी काली कमाई भी जब्त होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे एक वर्ष के कार्यकाल में जो भ्रष्ट अफसर- कर्मचारी नहीं सुधरे हैं, उनके साथ भी निर्ममता से व्यवहार किया जाएगा। उनके साथ तो अब वैसा व्यवहार होगा, जैसा कि अपराधियों के साथ किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश को हम क्राइम और करप्शन फ्री स्टेट बनाएंगे। हमारे इस अभियान के रास्ते में जो भी आड़े आएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अफसर क्यों न हो सरकार कार्रवाई में संकोच नहीं करेगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के लोग समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के मौकापरस्त गठबंधन, इनके बीच सत्ता को लेकर हुई सौदेबाजी को जानते हैं। दोनों का चरित्र एक है। इन लोगों ने देश की हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्था को खत्म करने का पाप किया है। सिर्फ अपने और अपने लोगों के विकास के बारे में सोचा है। प्रदेश का विकास इनकी सोच में ही नहीं था। जब सोच ही नहीं थी तो निवेश और इसके लिए जरूरी बुनियादी संरचना के बारे में क्या सोचेंगे। सबके बावजूद नौकरशाही का अड़ंगा अलग से। सरकार नहीं चला रहे थे, उसे सरका रहे थे। इनकी राजनीति ने प्रदेश को बहुत पीछे किया है। कैग की रिपोर्ट में हर विभाग में हजारों करोड़ का घोटाला इसका सुबूत है। इस सबका खमियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की। एक जिला एक उत्पाद की संभावनाओं का भी जिक्र किया। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने की प्रतिबद्धता के साथ झांसी मेडिकल कालेज की घटना को लेकर चिकित्सकों को नसीहत भी दी। यह भी कहा कि होने वाली पुलिस भर्ती में सरकार का लक्ष्य 20 फीसद महिलाओं की भर्ती का है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्ष में सच बोलने का साहस नहीं है। इन पर मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू वाली कहावत चरितार्थ होती है। हर हार के बाद इवीएम इनके निशाने पर रही है। यहां तक कि गोरखपुर के उपचुनाव के शुरुआती चरणों के मतगणना के दौरान भी इस पर सवाल उठाए। अब जब दोनों चुनावों में जीत गए तो कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं। 


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