यूपी : लोक सेवा आयोग की भर्तियों के भ्रष्टाचार मामले में सपा सरकार पर गिरी गाज

पोलखोल न्यूज़, लखनऊ 3/27/2018 1:21:58 AM
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प्रतियोगी छात्रों ने लोक सेवा आयोग की भर्तियों के भ्रष्टाचार मामले में पूववर्ती सपा सरकार में शामिल प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग उठाई है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से इस बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा गया है। समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सपा शासनकाल के दौरान आयोग की पीसीएस, पीसीएस जे, लोअर सबआर्डिनेट, आरओ-एआरओ सहित अन्य भर्तियों में भ्रष्टाचार सपा सरकार में शामिल प्रभावशाली लोगों के संरक्षण से किया गया। इन्हीं प्रभावशाली लोगों ने नियम और योग्यता को दरकिनार करते हुए डॉ. अनिल यादव को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था। जिन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर हटाया गया। अवनीश का दावा है कि सपा शासनकाल में हुई सभी भर्तियों में इन प्रभावशाली लोगों की दखल रही। आयोग की सर्वाधिक विवादित पीसीएस 2015 मेन्स परीक्षा का परिणाम भी ऐसे लोगों के दबाव में आनन-फानन में घोषित किया गया था। अवनीश का कहना है कि सरकार के प्रभावशाली लोगों की सहभागिता इस बात से भी उजागर होती है कि जब उन्होंने आरटीआई के तहत आगरा पुलिस से पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के अपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी मांगी थी तो पुलिस ने शून्य लिखकर भेज दिया था। बाद में हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार से हलफनामा मांगे जाने पर राज्य सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों के बारे में जानकारी दी थी। अवनीश ने सपा शासनकाल में नियुक्त आयोग के दो सदस्यों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इनमें से एक के खिलाफ मुकदमा दर्ज है जबकि दूसरे पर तथ्यों को छिपाकर गलत सूचना देकर सदस्य बनने का आरोप है। एक अन्य पर नौकरी में रहते हुए विधि स्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल करने का आरोप है। संपत्ति की भी हो जांच अवनीश ने सपा सरकार के प्रभावशाली लोगों द्वारा पांच वर्षों में अर्जित की गई संपत्ति की जांच की मांग भी की है। उनकी मांग है कि यह जांच भी भर्तियों में भ्रष्टाचार की जांच कर रही सीबीआई टीम को दी जाए। अवनीश का स्पष्ट आरोप है कि अगर पूर्व सरकार ने डॉ. यादव को अध्यक्ष पद पर नहीं बैठाया होता तो लाखों मेधावी प्रतियोगी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होता।


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