यूपी : लोहिया संस्थान का निर्णय मिलेगा मुफ्त इलाज, सुपर स्पेशलियटी सेवाओं का शुल्क देना होगा

पोलखोल न्यूज़, लखनऊ 4/23/2018 2:40:32 AM
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लोहिया संस्थान व अस्पताल के विलय का निर्णय हो गया है। ऐसे में दोनों के एक होने के बावजूद इलाज के शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। मरीजों को सिर्फ सुपर स्पेशलियटी सेवाओं का भी भुगतान करना होगा। दरअसल, लोहिया अस्पताल जनरल हॉस्पिटल है। वहीं, लोहिया संस्थान सुपर स्पेशलियटी है। अस्पताल में जहा अधिकतर सेवाएं नि:शुल्क हैं। वहीं संस्थान में हर सुविधा का शुल्क है। ऐसे में दोनों के विलय के बाद शुल्क को लेकर पुराना नियम लागू रहेगा। निदेशक डॉ. दीपक मालवीय के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। जिन सेवाओं के न्यूनतम शुल्क सरकार द्वारा निर्धारित हैं, वहीं लागू रहेंगे। इसके अलावा यदि मरीज को सुपर स्पेशलियटी सेवाओं की जरूरत पड़ती है, यानी कि उन्हें अस्पताल से संस्थान में शिफ्ट किया जाता है तो तय शुल्क लिया जाएगा। नहीं बदलेगा पंजीकरण शुल्कलोहिया अस्पताल में ओपीडी का पर्चा एक रुपये में ही बनेगा। वहीं संस्थान में तय 100 रुपये का कार्ड बनेगा। ऐसे में विलय के बाद मरीजों को कोई भार नहीं पड़ेगा। यही नहीं दोनों का ऑपरेशन शुल्क भी पहले जैसा ही रहेगा। शिफ्ट किए जाएंगे बालरोग और स्त्री रोग विभाग लोहिया अस्पताल परिसर से बाल रोग व स्त्री रोग विभाग हटाए जाएंगे। यह दोनों विभाग विलय के बाद संस्थान के शहीद पथ स्थित रेफर हॉस्पिटल में शिफ्ट किए जाएंगे। ऐसे में अस्पताल में दो सौ के करीब बेड मिल जाएंगे। इससे संस्थान की अन्य इमरजेंसी सेवाएं रन होने में आसानी हो जाएगी। वहीं रेफरल हॉस्पिटल में गर्भवती व जच्चा-बच्चा का इलाज मुफ्त होगा। छात्रों की शुरू हो सकेगी क्लीनिक टेनिंगलोहिया संस्थान में एमबीबीएस के 150 छात्र पढ़ते हैं। इनकी क्लीनिकल ट्रेनिंग को लेकर समस्या चल रही थी। वहीं विलय के बाद छात्रों की क्लीनिक ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। अस्पताल स्टाफ में असमंजस संस्थान में विलय की खबर पर अस्पताल के स्टाफ में असमंजस बना हुआ है। कारण, तमाम डॉक्टर संस्थान के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे में उन्हें स्वास्थ्य विभाग के अन्य अस्पतालों में ट्रासफर किया जाएगा। इसको लेकर वह घबराए हुए हैं। विलय से सरकार के बचेंगे करोड़ों रुपये

एमबीबीएस की मान्यता बरकरार रहेगी।

सरकार को नए विभागों की स्थापना के लिए करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे।

जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, नेत्र रोग, आथरेपैडिक, ईएनटी विभाग के लिए भवन व वार्ड नहीं बनाने पड़ेंगे 1 मरीजों को सामान्य बीमारियों का भी सुपर स्पेशलियटी इलाज मिल सकेगा।

न्यूरो सर्जरी, कैंसर, गैस्ट्रो, नेफ्रो आदि सुपर स्पेशलियटी विभागों की इमरजेंसी सेवाएं शुरू हो जाएंगी।

इससे पीजीआइ व केजीएमयू में पड़ने वाला भार कम हो जाएगा। क्या कहना है जिम्मेदारों का?

लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय का कहना है कि मेरी पूरी तैयारी है। अस्पताल के विलय होते ही, सेवाओं का तत्काल विस्तार कर दिया जाएगा। इलाज संबंधी शुल्क अस्पताल व संस्थान में पहले जैसे रहेंगे।


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