ग्रामीणों ने पुलिस से ही 25 लाख रुपए ऐंठने का बना डाला प्लान

पोलखोल न्यूज़ 8/5/2016 10:57:55 PM
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अब तो आम आदमी भी पुलिस को बेवकूफ बनाने लगा है| ताजा मामला मेरठ में सामने आया है| यहां कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को ने केवल बेवकूफ बनाया बल्कि पुलिस से 25 लाख रूपये वसूलने की योजना भी बना डाली| इतना ही नहीं अपने मंसूबो में साजिशकर्ता लगभग कामयाब भी हो गए थे| साजिश के तहत थाना अध्यक्ष सहित एक दारोगा और एक सिपाही पर अपहरण का मुकदमा भी दर्ज हो गया, लेकिन पुलिस ने ऐन वक्त पर साजिश का पर्दाफाश करते हुए कथित अपहृत फरार व्यक्ति को पकड़ लिया| दरअसल 30 जुलाई को मेरठ के थाना रोहटा पुलिस एक शातिर बदमाश का सहयोग करने पर गांव से मंजू शर्मा नाम के एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई| लेकिन उसके बाद ही मंजू शर्मा शौच करने का बहाने बनाकर थाने से फरार हो गया| जिसके बाद परिवारवालों ने कुछ राजनैतिक लोगों के साथ थाने पर पहुंचकर मंजू शर्मा का अपहरण कर गायब करने का पुलिस पर ही आरोप लगाते हुए थाने में जमकर हंगामा किया| पूरे थाने में तालाबंदी कर दी गई| इसके दबाव में पुलिस के आलाधिकारियों ने थानाध्यक्ष वसीम खान के साथ एक दारोगा और एक सिपाही पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया| तब जाकर लोग शांत हुए| दो दिन बाद मंजू शर्मा के परिजनों ने फिर कुछ राजनैतिक लोगों के साथ मिलकर डीआईजी लक्ष्मी सिंह का घेराव किया| डीआईजी ने पूरे मामले में जांच कर जल्द ही मंजू की बरामदगी का आश्वाशन दिया| पुलिस की माने तो मंजू शर्मा थाने से भागकर हरिद्वार अपनी बेटी के पास पहुंचा और वहां अपने परिजनों को भी बुलवाया| फिर बनाया गया पुलिस से ही 25 लाख रूपये वसूलने का प्लान, जिसमे तय हुआ कि मंजू शर्मा लंबे समय तक गायब रहेगा जिससे पुलिस दबाव में रहेगी और फिर मजबूरन पुलिस को पैसे देने ही होंगे| प्लान के मुताबिक मंजू राजस्थान में बाबा मनोरराम आश्रम में जाकर छिप गया, लेकिन पुलिस से पैसे लेने के लिए मंजू को अपने परिवार से एक आखिरी मीटिंग करनी थी. जिसके लिए 6 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई| उसके बाद मंजू वापस यूपी आ गया और शुक्रवार को मवाना में अपनी बहन से मिलने के लिए जा रहा था| लेकिन मुखबिर की सूचान पर थाना रोहटा पुलिस और थाना मवाना पुलिस ने संयुक्त रूप से मंजू को पकड़ लिया और पूरी कहानी से पर्दा उठा दिया| उधर पूरी कहानी में मोहरा बने मंजू शर्मा का कहना है कि उसको नहीं मालूम कि कोई ऐसी प्लानिंग थी वो तो केवल पुलिस के डर से वापस नहीं आ रहा था, लेकिन परिवार के संपर्क में था| वह परिवार के लोगों के माध्यम से हर हंगामे और एक्टिविटी पर नज़र बनाए हुए था| पूरी कहानी लगातार चल रही थी परिवार को सब कुछ पता होने के बाद भी वो डीआईजी ऑफिस पर हंगामा और घेराव करते रहे| पुलिस ने फ़िलहाल मंजू शर्मा को परिवार के हवाले कर दिया है जबकि षडयंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की है| इस कहानी में सवाल ये उठता है कि एक व्यक्ति जिसको पुलिस पूछताछ के लिए लेकर थाने पर आई और वो शौच के बहाने से फरार हो जाता है. ये कैसे पॉसिबल है? क्या बिना पुलिस की मदद के ऐसा हो सकता है कि कोई थाने से फरार हो जाए? क्या थाने में कोई शौचालय नहीं बना हुआ है? पुलिस पर उठ रहे इन सवालों को और मजबूती अब मिल गई है जब पुलिस ने इतना सब होने के बाद भी मंजू शर्मा को परिजनों के ही हवाले कर दिया| क्या इतना सब होने के बाद पर भी मंजू शर्मा पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी?

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