आयुर्वेद को संजीवनी

पोलखोल न्यूज़ 8/11/2016 3:40:29 AM
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प्रदेश में संजीवनी बूटी की खोज के बहाने आयुर्वेद के दिन बहुरने की उम्मीद सरकार की ओर से बंधाई जा रही है। इसे अच्छा संकेत माना जा सकता है, बशर्ते सरकार आयुर्वेद के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए शिद्दत से प्रयास करें पिछले कुछ अरसे से संजीवनी बूटी का मुद्दा काफी तूल पकड़ रहा है। रामायण में इसका वर्णन मिलता है। इसी आधार पर माना जाता है कि चमोली जिले के द्रोणागिरी पर्वत में संजीवनी बूटी पाई गई थी। केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें इस मामले में रूचि लेती दिखाई दे रही हैं। राज्य सरकार की ओर से बाकायदा संजीवनी शोध अभियान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्रालय इस संबंध में कई बार बैठक आयोजित कर चुका है। लुप्त मानी जा रही संजीवनी बूटी की नए सिरे से खोज के साथ ही अब आयुर्वेद को मिशन के तौर पर लेने पर जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन यह जोर और शोर धरातल पर सरकार के कामकाज से मेल नहीं दिखाई है। आयुर्वेद के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले आयुष महकमे और आयुष षिक्षण संस्थानों की हालत सुधारने की दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकारी आयुर्वेदिक कालेजों ऋषिकुल और गुरुकुल का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। इनकी दशा और दिशा दुरुस्त करने की दिषा में ठोस प्रयास नहीं किए जा सके हैं। कमोबेश यही स्थिति आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की भी है। विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद है। राजभवन की सख्त आपत्ति के बावूजद सरकार की ओर से इस बारे में अभी तक ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। उत्तराखंड में जड़ी-बूटी के विकास, उत्पादन और विपणन की बेहतर संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र राज्य बनने के बाद से ही उपेक्षित है। जड़ी-बूटी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उसकी खेती को प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना में न तो सरकार और न ही आयुष महकमे ने रुचि ली है। पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद भारतीय जन-जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। लेकिन, परंपरागत ज्ञान से हो रहे निरंतर कटाव ने आयुर्वेद के प्रति जनता के भरोसे पर असर डाला है। इस परंपरागत ज्ञान को सहेजने को लेकर सरकार का मौजूदा रुख उत्साहजनक नहीं कहा जा सकता। जाहिर है कि आयुर्वेद के विकास को लुभावनी बयानबाजी से आगे बढ़कर सुनियोजित तरीके से काम करने की आवश्यकता है। 65 फीसद वन क्षेत्र वाले राज्य में इसे खेती का हिस्सा बनाया गया तो बेहतर परिणाम मिलने से इन्कार नहीं किया जा सकता। उम्मीद की जानी चाहिए कि संजीवनी बूटी के बहाने आयुर्वेद को संजीवनी मिलेगी।

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