आदर्श बनी काली कमली वाले की गोशाला

पोलखोल न्यूज़, ऋषिकेश | 8/12/2016 12:22:54 AM
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तीर्थनगरी ऋषिकेश में गोवंश संरक्षण के नाम पर कई धार्मिक संस्थाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन धरातल पर कुछ ही संस्थाएं ऐसी हैंए जो हकीकत में गोवंश की सेवा कर रही हैं। इन्हीं में से एक है बाबा काली कमली ट्रस्ट की आदर्श गोशाला। बाबा काली कमली वाले यानी स्वामी विशुद्धानंद महाराज के आदर्शों पर चलते हुए वर्ष 1933 में बाबा रामनाथ ने इसकी स्थापना की थी। ऋषिकेश-हरिद्वार मार्ग पर आइडीपीएल से पहले ट्रस्ट की आदर्श गोशाला स्थापित है। वर्तमान में यहां संकरा नस्ल की 190 गाय और उनके बछड़े पल रहे हैं। गोवंश के लिए चारे का उत्पादन ट्रस्ट की तीन सौ बीघा भूमि पर होता है। 135 बीघा में विशाल गोशाला बनी है। गोवंश को वर्षाकाल के दौरान गोशाला में ही रखा जाता है। बाकी समय में इन्हें खेतों में चरने के लिए छोड़ा जाता है। गायों की सेवा के लिए 20 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। जिनका वेतन और गोवंश पालन का पूरा खर्च ट्रस्ट स्वयं उठाया है। गोसेवकों के दान से पलने वाले गोवंश का 125 लीटर दूध काली कमली ट्रस्ट में ही खप जाता है। गोशाला में चारा कटान के लिए बाकायदा मशीन लगाई गई है। गायों के स्नान और गोशाला की सफाई की व्यवस्था भी ट्रस्ट अपने स्तर से करता है। बोरिंग कर पानी को टैंक में जमा किया जाता है और यही पानी गोवंश के काम आता है। प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में परिसर में विशेष रूप से नीम के पेड़ लगाए गए हैं। जिन्हें खाकर यहां पलने वाली गाय विकारों से मुक्त रहती हैं। गायों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक तीसरे सप्ताह राजकीय पशु चिकित्सक की सेवाएं गोशाला में ली जाती हैं। गायों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। जो गाय बीमार होती हैंए उन्हें अलग स्थान पर रखकर उनकी चिकित्सा व सेवा की जाती है। आदर्श गोशाला में होने वाले व्यय का पूरा ब्योरा रखने के लिए अलग से कर्मचारी तैनात किया गया है। प्रतिवर्ष बाबा काली कमली ट्रस्ट के कोलकाता स्थित मुख्यालय से यहां ऑडिटर आते हैं और गोशाला के लिए मिलने वाले दान का पूरा लेखा-जोखा जांचा जाता है काली कमली मुख्य गद्दी में अन्न क्षेत्र संचालित होता है। जिसमें दिनण्रात गरीब व साधुण्महात्माओं को भोजन कराया जाता है। गोशाला का दूध अन्न क्षेत्र के अलावा ट्रस्ट की ओर से संचालित संस्कृत महाविद्यालय के 80 छात्रों को दिया जाता है। गोशाला से जमा गोबर को खाद के रूप में अपने ही खेतों में प्रयुक्त किया जाता है।गोवंश को मृत्यु के बाद भी गोशाला से बाहर नहीं किया जाता। ट्रस्ट के प्रबंधक धर्मेंद्र कंसल ने बताया कि दुधूपानी गुमानीवाला में पांच बीघा भूमि पर एक अन्य गोशाला बनाई गई है। इसमें वृद्ध और बीमार गायों को रखा जाता है। वर्तमान में यहां 35 गाय हैं। मृत्यु के बाद गायों को अपने ही खेतों में दफनाया जाता है। बताया कि ट्रस्ट का मकसद गोकशी रोकने के साथ ही गोवंश का संरक्षण करना है।

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