ड्रैगन पर मेक इन इंडिया का पहला पंच

पंकज राणा, पोलखोल न्यूज़, देहरादून 8/19/2016 12:02:09 AM
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मेक इन इंडिया का पहला पंच ड्रैगन पर भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आइआइपी) ने मारा है। आइआइपी की वैक्स डी-ऑयलिंग तकनीक पर असोम में लगाए गए 696 करोड़ रुपये के कारखाने से इस साल से 50 हजार टन वैक्स (मोम) का उत्पादन किया जाएगा। इससे देश में वैक्स के आयात का ग्राफ 50 फीसद तक कम हो गया है। अभी हम चीन से बड़ी मात्रा में वैक्स आयात करते आ रहे हैं, मगर अब इस दिशा में काफी हद तक आत्मनिर्भरता हासिल कर ली गई है। खास बात यह कि नेपाल, बांग्लादेश, केन्या आदि देशों को भी वैक्स निर्यात करने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। ये देश भी अभी वैक्स के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। आइआइपी के उत्कृष्ट (आउटस्टैंडिंग) वैज्ञानिक डॉ. एमओ गर्ग के अनुसार संस्थान की तकनीक पूरी तरह से मेक इन इंडिया पर आधारित है। असोम (नुमालीगढ़) में वैक्स उत्पादन का कारखाना लगाने के बाद अब नजर मुंबई हाई व राजस्थान के कच्चे तेल पर है। मुंबई हाई के तेल में वैक्स की मात्रा असोम के बराबर (08-10 फीसद) ही है, जबकि राजस्थान के तेल में यह मात्रा 15 फीसद तक पाई गई है। इन क्षेत्रों में भी वैक्स उत्पादन के प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि मोम उत्पादन की क्षमता को बढ़ाया जा सके। इससे देश के मोम बाजार को नया आयाम मिल पाएगा। साथ ही मोम के उत्पादों के दाम में भी गिरावट आने की उम्मीद की जा रही है। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान की वैक्स बनाने की तकनीक को लेकर इंडोनेशियाए ईरानए सउदी अरब आदि देशों ने संस्थान से संपर्क किया है। ये देश अपने यहां भी कच्चे तेल से मोम लगाने के लिए वैक्स डी-ऑयलिंग तकनीक अपनाना चाहते हैं। उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. एमओ गर्ग ने बताया कि हालांकि वार्ता अभी प्रारंभिक दौर में है, मगर इसके सकारात्मक परिणाम आने की पूरी उम्मीद है। इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आइओसी) ने वर्ष 1998 के आसपास अमेरिका आधारित वैक्स बनाने की तकनीक अपनाई थी। अब इस तकनीक को अमेरिका ने आउट-डेट करार दिया है। डॉ. गर्ग का मानना है कि अब भारत एकमात्र ऐसा देश के है, जिसके पास वैक्स बनाने की सबसे नवीनतम तकनीक है। इससे देश ही नहीं, बल्कि देश से बाहर की कंपनियां भी वैक्स डी-ऑयलिंग तकनीक को अपनाने का प्रयास करेंगी।

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