कांग्रेस ने दी सफाई
नई दिल्ली। पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक विवादित टिप्पणी को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता का जिक्र करते हुए दिए गए बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। भाजपा ने खरगे से बिना शर्त माफी मांगने की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी है।
पटना के कार्यक्रम में कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। यहां भाषण देते समय खरगे को कथित तौर पर एक व्यक्ति की टिप्पणी का जवाब देना पड़ा। बताया गया कि उस व्यक्ति ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा, ‘मोदी के बाप भी चले जाएंगे।’ उनके इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोल दिया।
भाजपा का देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान
कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी के खिलाफ भाजपा ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से सभी राज्यों में भाजपा कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने की तैयारी की गई है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के इस विरोध में शामिल होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर नेताओं को अपनी भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
खरगे से माफी की मांग, कांग्रेस पर भी निशाना
भाजपा ने खरगे के बयान को राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ बताते हुए उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने के लिए लगातार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि राजनीतिक विरोध के दौरान किसी के परिवार या दिवंगत परिजनों को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। पार्टी ने कांग्रेस से भी सवाल किया है कि क्या वह अपने अध्यक्ष के बयान को सही ठहराती है।
रविशंकर प्रसाद ने बताया शर्मनाक बयान
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा पर सवाल उठाए। प्रसाद ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक असफलताओं के बाद पार्टी चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े करती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे नेता से सार्वजनिक मंच पर संयमित भाषा की अपेक्षा की जाती है।
कांग्रेस ने बताया बयान के पीछे का संदर्भ
वहीं, कांग्रेस ने खरगे की टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा है कि उनके बयान को पूरे घटनाक्रम से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने दावा किया कि कार्यक्रम में खरगे के भाषण के दौरान एक व्यक्ति ने टिप्पणी की थी कि यदि उनके पिता भी आ जाएं, तब भी नरेंद्र मोदी चुनाव नहीं हारेंगे। कांग्रेस के मुताबिक, खरगे ने इसी टिप्पणी के जवाब में अपनी बात कही थी।
पवन खेड़ा ने उत्तराखंड में आयोजित एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जहां उनके आरोप के अनुसार खरगे के संबोधन से पहले कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म की गई थी। उन्होंने कहा कि खरगे की टिप्पणी का संदर्भ केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी विचारधारा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर भी था।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा टकराव
खरगे की टिप्पणी के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति अपमानजनक बयान मानते हुए माफी की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे कार्यक्रम में की गई कथित टिप्पणी की प्रतिक्रिया बता रही है। इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक मंचों पर नेताओं की भाषा, मर्यादा और बयानबाजी को लेकर बहस तेज कर दी है।
